आधार कार्ड व जन्म प्रमाणपत्र के कारण पढ़ाई छोड़ रहे बिहार के हजारों बच्चे

आधार कार्ड व जन्म प्रमाणपत्र के कारण पढ़ाई छोड़ रहे बिहार के हजारों बच्चे

बंदरा, मुजफ्फरपुर से

विभा कुमारी की रिपोर्ट

  • आधार कार्ड बनवाने के लिए बच्चों का आवासीय प्रमाणपत्र के साथ जन्म प्रमाणपत्र भी संलग्न करना है जरूरी
  • प्रक्रिया जटिल होने से लोग कार्यालयों का लगा रहे चक्कर, कई दिन छोड़ना पड़ता है काम
  • आधार कार्ड बनाने के नाम पर 1000 से लेकर 3000 रुपये तक की होती है वसूली
  • मतलूपुर के करमैठा टोला, तेपरी डोम टोला समेत अन्य दलित-महादलित टोले के बच्चे के अलावा व्यस्क लोगों के पास भी
  • आधार कार्ड आज तक नहीं बना कल्याणकारी योजनाओं का नहीं मिल पाता लाभ

मुजफ्फरपुर. आधार कार्ड की समस्या ग्रामीण क्षेत्र के गरीब-मजदूर एवं अभिवंचित तबकों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुकी है. आधार कार्ड बनवाने के लिए 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों को आवासीय प्रमाणपत्र के साथ-साथ जन्म प्रमाणपत्र भी संलग्न करना पड़ता है. इन दोनों प्रमाणपत्र, खासकर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि गरीब-मजदूर आदमी बार-बार कार्यालयों का चक्कर नहीं लगा पाते हैं. एक अशिक्षित एवं गरीब आदमी के लिए कोर्ट जाकर एफिडेविट बनवाना मुश्किल भरा काम होता है. एक प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उन्हें कई दिन काम छोड़ना पड़ता है. एक तरफ आर्थिक नुकसान और दूसरी तरफ बार-बार ऑफिस का चक्कर. इस कारण ये लोग जन्म प्रमाणपत्र व आधार कार्ड नहीं बनवा पाते

आधार कार्ड व जन्म प्रमाणपत्र के कारण पढ़ाई छोड़ रहे बिहार के हजारों बच्चे

हैं. आधार कार्ड बनाने के नाम पर इनसे 1000 से लेकर 3000 रुपये तक की वसूली कर ली जाती है. कई
सरकारी आधार कार्ड सेंटर भी सही तरीके से सेवा नहीं दे पा रहे
प्रखंडों में सरकारी आधार कार्ड सेंटर भी सही तरीके से सेवा नहीं दे पा रहे हैं. इसका परिणाम यह होता है कि काफी संख्या में बच्चे स्कूल में नामांकन से वंचित रह जाते हैं. मतलूपुर के करमैठा टोला, तेपरी डोम टोला समेत अन्य दलित-महादलित टोले के बच्चे के अलावे व्यस्क लोगों के पास भी आधार कार्ड आज तक नहीं है, जिसकी वजह से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता है. मुजफ्फरपुर व शिवहर जिले के दर्जनों ऐसे अभिवंचित वर्गों के टोले हैं, जहां सैकड़ों बच्चों, महिलाओं व पुरुषों के पास आधार कार्ड नहीं हैं.

साइबर सेंटर से बनवाया था जन्म प्रमाणपत्र,फर्जी निकला

मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के बगाही मांझी टोले के कई बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि हमने अपने बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र स्थानीय साइबर सेंटर से बनवाया था, जो फर्जी निकला. इसके लिए हमलोगों से 500-500 रुपये लिये गये थे. इसी टोले की पुनीता देवी ने बताया कि हमलोगों को पता ही नहीं चला था कि जन्म प्रमाणपत्र गलत बना कर दे दिया है. ठगी के शिकार अभिभावकों ने बताया कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण स्कूल में नामांकन नहीं हो पा रहा था, तो मैं हरपुर चौक पर एक आधार कार्ड सेंटर गयी, तो उसने बताया कि आपका जन्म प्रमाणपत्र गलत है. पुनीता देवी ने कहा कि यहां के कम-से-कम 5 बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र गलत बना कर दिया गया है. जांच किया जाए, तो और बच्चों का प्रमाणपत्र फर्जी निकलेगा. बंदरा के हरपुर चिकनी मांझी टोले की मंजू देवी ने बताया कि मैंने जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दो जगह गयी. एक जगह 500 रुपये दिये और दूसरी जगह 800 रुपये दिये, तब भी मेरे बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र सही हो पाया.

मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर समेत 20 जिलों में नामांकन में 10 फीसदी की गिरावट

अभी हाल में यूडायस 2025-26 के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान यह मामला सामने आया है कि बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, किशनगंज, गया समेत 20 जिलों में नामांकन में 10 फीसदी की गिरावट आयी है. कैमूर में 200 से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां विभिन्न कक्षाओं में शून्य नामांकन है. मुजफ्फरपुर जिले में ऐसे 121 स्कूल हैं. इनमें 85 स्कूल ऐसे हैं, जहां कक्षा एक में शून्य नामांकन है. राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने सभी संबंधित डीइओ को इसकी भौतिक जांच का आदेश दिया है. उन्होंने रिपोर्ट मांगी है कि यह गिरावट क्यों आयी? इस संबंध में शिक्षा व समुदाय के बीच काम करने वाली स्थानीय कार्यकर्त्ता रागिनी कुमारी का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि इस गिरावट में बच्चों के पास जन्म प्रमाणपत्र व आधार कार्ड का नहीं बन पाना एक बड़ा कारण हो सकता है. सरकार को जन्म प्रमाणपत्र व आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल करना चाहिए. स्कूली बच्चों एवं अभिवंचित समुदाय के लोगों के आधार कार्ड बनाने की अलग एवं आसान व्यवस्था करनी चाहिए. सुदूर देहात से जिला मुख्यालय जाकर आधार कार्ड बनवाना उनके लिए आसान नहीं है.

नामांकन के लिए भी आधार कार्ड जरूरी

राजकीय मध्य विद्यालय रामपुरदयाल बंदरा मुजफ्फरपुर की शिक्षिका वंदना राज कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक समस्या आज के समय में आधार कार्ड प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है. स्कूल में बच्चों के नामांकन के लिए भी आधार कार्ड जरूरी है, क्योंकि अब हर प्रक्रिया ऑनलाइन हो गयी है. लेकिन ग्रामीण स्तर पर यह देखा जा रहा है कि बहुत सारे बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बच्चों के पास आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण उनका स्कूल में नामांकन नहीं हो पाता है. छात्रवृति, मिड-डे मील एवं अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. इसके अलावा बैंक खाता खोलने, प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने और कई बार फ्री राशन जैसी जरूरी सेवाओं से भी वंचित रह जाना पड़ता है. अतः बच्चों की शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों के लिए यह जरूरी है कि उनका आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाण पत्र समय पर बनवाएं. साथ ही, 5 से 15 साल की उम्र में बायोमेट्रिक अपडेट जरूर कराएं.

मुसहर टोली में बहुत सारे बच्चों व अभिभावकों के पास आधार कार्ड नहीं

पश्चिम चंपारण की लक्ष्मी देवी ने बताया कि रामनगर नगर पंचायत स्थित मुसहर टोली में बहुत सारे बच्चों एवं अभिभावकों के पास आधार कार्ड नहीं हैं. पूर्वी चंपारण के फुलवरिया पंचायत के मुसहर टोली में 50 से अधिक लोगों के पास आधार कार्ड नहीं हैं. यहां के लोग आधार कार्ड के महत्व से अनभिज्ञ हैं.
रोहतास की तारा देवी ने बताया कि सागर प्रखंड के रोझईं मांझी टोला में दो दर्जन से अधिक बच्चों एवं अभिभावकों के पास आधार कार्ड नहीं हैं. इस कारण उनका स्कूल में नामांकन नहीं हो पा रहा है. कैमूर के कुदरा प्रखंड के करमा गांव की नट बस्ती, अहीरवालिया मांझी बस्ती, देवराढ़ कला मुसहर टोला व गजराढ़ी मुसहर टोला में आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाण से काफी लोग वंचित है. दीपमाला संस्था कैमूर की राजमुनि देवी ने बताया कि हम अपनी टीम के साथ कुदरा प्रखंड की बीडीओ सुश्री शांभवी श्रीवास्तव से मिलकर इस समस्या से अवगत करायी. उन्होंने बताया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पास आधार कार्ड नहीं हैं. उन्होंने कैंप लगा कर इस समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया.

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