झुग्गी-बस्ती में अप्पन समाचार की टीम ने मनाया महिला दिवस

Appan Samachar team celebrating International Women’s Day with Musahar community women in slum area of Muzaffarpur Bihar

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

  • मुसहर बस्ती में महिलाओं व किशोरियों के संग शिक्षा के महत्व पर चर्चा की गयी.

  • अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग ने साझा किए अपने अनुभव

  • शिक्षा को बताया महिला सशक्तीकरण का सबसे बड़ा हथियार

मुजफ्फरपुर (मड़वन)। रविवार को ‘अप्पन समाचार(ऑल वूमेन कम्युनिटी न्यूज़ नेटवर्क) के तत्वावधान में मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंडन्तर्गत आरिजपुर गांव स्थित मुसहर बस्ती में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘अप्पन समाचार चिट्ठा’ की संपादक यशोदा कुमारी पासवान ने की. इस अवसर पर स्थानीय महिलाएं और किशोरियां उपस्थित रहीं. झुग्गी-बस्ती की इन महिलाओं ने अपनी समस्याओं तथा अपने जीवन संघर्षों के बारे में खुलकर बातें रखीं.

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों के बीच व्याप्त अशिक्षा, अस्वस्थता, गरीबी, जीविकोपार्जन की समस्या, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक हिंसा, बाल विवाह के दुष्परिणाम, अंधविश्वास और विभिन्न सामाजिक कुरीतियों जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. अप्पन समाचार के संस्थापक संतोष सारंग ने कहा कि समाज के सबसे वंचित तबके की लड़कियों तक शिक्षा की रोशनी और जागरूकता पहुंचाना ही वास्तविक महिला सशक्तीकरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है.

संस्था के को-फाउंडर अमृतांज इंदीवर ने कहा कि इन समस्याओं से मुक्ति पाने का सबसे प्रभावी उपाय शिक्षा है. उन्होंने महिलाओं व किशोरियों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का मार्ग खोलती है.

चर्चा के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इस मुसहर बस्ती में केवल एक-दो महिलाएं ही मैट्रिक तक पढ़ी हैं, जबकि अधिकतर महिलाएं और किशोरियां पूरी तरह निरक्षर हैं. एक बुजुर्ग महिला ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पढ़-लिख कर क्या होगा? अगर लड़की स्कूल जाएगी तो, घर का काम कौन करेगा? मजदूरी कौन करेगा और रोज़ी-रोटी कैसे चलेगी? ऐसे में पढ़ाई से ज्यादा जरूरी मजदूरी करना है. पढ़ने के बाद भी तो नौकरी नहीं मिलती है.

इस पर संतोष सारंग ने उपस्थित महिलाओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को बेहतर बनाने का आधार है. उन्होंने कहा कि अगर बेटियां पढ़ेंगी, तो वे न केवल अपने अधिकारों को समझेंगी, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. शिक्षा के माध्यम से ही गरीबी, शोषण और सामाजिक कुरीतियों से बाहर निकलने का रास्ता बनता है.

यशोदा कुमारी पासवान ने कहा कि बाल विवाह, अंधविश्वास और लैंगिक भेदभाव जैसी कुरीतियां समाज के विकास में बड़ी बाधा है. इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए महिलाओं का शिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है.उन्होंने महिलाओं को अपने बच्चों, खासकर बेटियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया.

कार्यक्रम के अंत में महिलाओं और किशोरियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया. साथ ही सभी उपस्थित महिलाओं ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपने परिवार और समुदाय में शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देंगी और बाल विवाह व अन्य सामाजिक कुरीतियों का विरोध करेंगी.

रिपोर्ट : अप्पन समाचार टोली

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