मड़वन के गांव-गांव तक पहुंचेगा अप्पन समाचार

मड़वन के गांव-गांव तक पहुंचेगा अप्पन समाचार
  • सामुदायिक मीडिया पर एकदिवसीय कार्यशाला
  • यशोदा कुमारी पासवान होंगी ‘अप्पन समाचार चिट्ठा’ की संपादक
  • मुख्यधारा व वैकल्पिक मीडिया की भूमिका पर व्यापक चर्चा

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मड़वन प्रखंड के मकदुमपुर कोदरिया में रविवार को ऑल वूमेन न्यूज चैनल (सामुदायिक मीडिया)  अप्पन समाचार की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मीडिया की भूमिका, विशेष रूप से मुख्यधारा और वैकल्पिक मीडिया के महत्व को समझाना तथा महिलाओं और किशोरियों को पत्रकारिता कौशल से परिचित कराना था। कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं, किशोरियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

मड़वन के गांव-गांव तक पहुंचेगा अप्पन समाचार

कार्यशाला की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक संतोष सारंग ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ — मीडिया — की वास्तविक स्थिति, उसकी जिम्मेदारियों और समाज में उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मुख्यधारा की मीडिया कई बार समाज के हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज़ को पर्याप्त स्थान नहीं दे पाती। ऐसे में “अप्पन समाचार” जैसे सामुदायिक चैनल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह मंच उन महिलाओं, गरीब तबकों और वंचित समूहों की आवाज़ बनकर उभर रहा है, जिनकी समस्याएँ अक्सर बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म तक नहीं पहुँच पातीं।

मड़वन के गांव-गांव तक पहुंचेगा अप्पन समाचार

उन्होंने आगे बताया कि अप्पन समाचार केवल एक मीडिया मंच नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक उपकरण (टूल) है, जो ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करता है। यह संस्था प्रतिभागियों को लेखन, दृश्यांकन (वीडियोग्राफी), वृत्तचित्र निर्माण तथा प्रस्तुतीकरण जैसे कौशलों का प्रशिक्षण देकर उनके व्यक्तित्व का विकास करती है। इससे उनमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, संवैधानिक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है और वे समाज में अपनी वास्तविक भूमिका निभाने के लिए तैयार होती हैं। इस प्रकार यह पहल सामुदायिक और नागरिक पत्रकारिता का एक नया प्रतिमान स्थापित कर रही है।

कार्यशाला में अमृतांज इंदीवर ने अप्पन समाचार की शुरुआत, उसके प्रचार-प्रसार, रिपोर्टिंग प्रक्रिया, स्क्रिप्ट लेखन तथा समाचार वाचन की तकनीकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि समाचार केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना भी है। उन्होंने वैकल्पिक मीडिया की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक स्थानीय समस्याएँ स्थानीय लोगों द्वारा सामने नहीं लाई जाएँगी, तब तक उनका उचित समाधान संभव नहीं है।

फूलदेव पटेल ने अपने वक्तव्य में अप्पन समाचार के सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस चैनल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी-छोटी किंतु महत्वपूर्ण खबरें सामने आ रही हैं, जैसे—पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, महिला सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन। इन समाचारों के प्रसारण से प्रशासन का ध्यान समस्याओं की ओर जाता है और समाधान की प्रक्रिया तेज होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण पत्रकारिता को नई दिशा दे रही है।

कार्यशाला में स्थानीय प्रतिभागियों— किरण, आरती, निशा, ज्योति, मुन्नी, आंचल, अनन्या राज, सोनम, रवीना, सुष्मिता, खुशबू और मृदुला —ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मीडिया से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों ने कैमरा संचालन, साक्षात्कार लेने की विधि, समाचार लेखन और प्रस्तुति के व्यावहारिक पक्षों को भी समझा। इस प्रशिक्षण से उनमें आत्मविश्वास का संचार हुआ और वे सामाजिक मुद्दों को सामने लाने के लिए प्रेरित हुईं।

कार्यक्रम के दौरान मड़वन क्षेत्र में एक कोर टीम के गठन और उसके क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। इस क्रम में यशोदा कुमारी पासवान को अप्पन समाचार चिट्ठा का संपादक चयनित किया गया है, जो क्षेत्रीय गतिविधियों का समन्वय करेंगी। साथ ही अप्पन समाचार के क्षेत्रीय कार्यालय और स्टूडियो की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान एवं आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया गया।

निर्णय लिया गया कि गठित टीम आसपास के गांवों की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को नियमित रूप से कवर करेगी। इसके आधार पर चैनल के लिए समाचार, रिपोर्ट, आलेख तथा “अप्पन समाचार चिट्ठा” के लिए सामग्री तैयार की जाएगी। इससे स्थानीय समुदाय को अपनी बात कहने का मंच मिलेगा और जनसरोकार के मुद्दे व्यापक स्तर पर सामने आ सकेंगे।

समग्र रूप से यह कार्यशाला ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक पत्रकारिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इसने न केवल मीडिया के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि महिलाओं और किशोरियों को समाज में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित भी किया। भविष्य में इस प्रकार की पहल ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने तथा सामाजिक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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