कला के विविध रंगों से दमक उठा युवा उत्सव

पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया में तीन दिवसीय युवा महोत्सव का 14 दिसंबर को रंगारंग कार्यक्रम के साथ समापन हो गया. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 12 को रंगभूमि मैदान स्थित इंदिरा गांधी स्टेडियम में राज्यस्तरीय इस युवा उत्सव का उद्घाटन किया था. इस अवसर पर राज्पाल ने चंद्रगुप्त, वराहमिहिर, मंडन मिश्र, राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश, कर्पूरी ठाकुर, राष्ट्रकवि दिनकर व फणीश्वरनाथ रेणु को याद करते हुए कहा था कि बिहार ने हर क्षेत्र में ऊंचाई हासिल की है. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि युवा उत्सव का उद्देश्य एक संस्कृति को दूसरे संस्कृति से जोड़ना है. कला एवं संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि ने कहा कि जट-जटिन और आल्हा-ऊदल की संस्कृति को आज जिंदा करने की जरूरत है.

उद्घाटन समारोह के बाद कला यात्रा के साथ रंगारंग कार्यक्रमों का शुभारम्भ हुआ. ”हिप हिप हुर्रे” के नारों के साथ कला यात्रा की शुरुआत हुई. कला यात्रा में शामिल जिलेभर के कलाकार पूरे रौ में दिखे. दरभंगा के कलाकार ‘जय मिथिला’ के नारे लगा रहे थे, जबकि नालंदा के कलाकार ‘नारी शक्ति और युवा शक्ति’ के नारे लगा रहे थे. बांका की टीम ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष कर रही थी. पटना के कलाकारों ने ‘सारा रा रा, बोल जोगीरा सारा रा रा’ के बोल से माहौल में गर्मी पैदा कर रहे थे. मधेपुरा के कलाकार साज-बाज के साथ भगैत गाते हुए चल रहे थे. समस्तीपुर की टीम ठुमके लगा रही थी, तो शेखपुरा की टीम सड़क पर भांगड़ा करते हुए आगे बढ़ रही थी. इस तरह राज्यभर से आये कलाकारों ने अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन कर महोत्सव जीवंत कर दिया.

दूसरे दिन 14 जिलों के प्रतिभागियों ने गीत-संगीत व नृत्य से महफ़िल सजाई. अररिया के विष्णु कुमार ने पहली प्रस्तुति दी. उन्होंने कथक नृत्य से सबका मन मोह लिया. इसके अलावा मधेपुरा की चंदा रानी, समस्तीपुर की पल्लवीश्री व दरभंगा की निकिता ने भी कथक नृत्य किया. जबकि जहानाबाद के सर्वनाम उपाध्याय व ममता कुमारी ने ओडिसी नृत्य पेश किया. भरतनाट्यम शैली में पूर्णिया के सूरज कुमार, अररिया के जाह्नवी, मुजफ्फरपुर की सीमारानी व जहानाबाद के गोलू कुमार ने भी नृत्य के जरिये दर्शकों का खूब मनोरंजन किया. पटना के सम्राट आध्या ने मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत किया. इस मौके पर आयोजित गायन प्रतियोगिता में लखीसराय, शेखपुरा, मुंगेर, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, सारण, दरभंगा, बक्सर, पटना, अरवल, सुपौल, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद समेत अन्य जिलों के कलाकरों ने शास्त्रीय संगीत व वादन में अपनी कलाकारी दिखायी.

अंतिम दिन समापन समारोह लोकगाथाओं के नाम रहा. लखीसराय के कलाकारों ने रेशमा-चुहरमल की प्रेमगाथा को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया. पूर्णिया की टीम ने सदावृत सारंगा, अरवल की टीम ने सत्य हरिश्चंद्र, भागलपुर ने बिहुला विषहरी, अररिया ने घुघली घाटम व गोपालगंज की टीम ने सौठी जमार की प्रेमकथा को जीवंत किया. गया के कलाकारों ने राजा भरथरी की पत्नी पिंगला की दीवानगी में अपना पूरा राज-काज भूल जाने की कथा को उभरा, तो सुपौल व मधुबनी के कलाकारों ने भगैत, शेखपुरा ने गहिल माई की पूजा व समस्तीपुर की कलाजत्था ने भगवती झूमर गीत प्रस्तुत की. एकल गीत में औरंगाबाद की डिंपल को ‘’रात नाहि नींद आवे, दिन में चैनवा, करेजबा हमरो धड़कल हे रामा’’ गीत पर दर्शकों की दाद मिली. इस तरह तीन दिनों तक प्रदेशभर के युवा कलाकारों ने कला व संस्कृति की जड़ों को मजबूत करती रही.

– अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क