तीसरा कृषि रोडमैप : खेती में इंद्रधनुषी क्रांति का सपना!

मुजफ्फरपुर. बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है. राज्य सरकार ने किसानों की हालत सुधारने व कृषि क्षेत्र के विकास के लिए पिछले महीने तीसरा कृषि रोडमैप का शुभारंभ कर चुकी है. दूसरे कृषि रोडमैप में लक्ष्य के अनुरूप अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण इस बार कुछ ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है. पेश है एक रिपोर्ट –

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दिनों तीसरा कृषि रोड मैप (2017-2022) के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा था कि यह दूसरी हरित क्रांति का आगाज है. इसे इंद्रधनुषी क्रांति का नाम देना बिल्कुल सही है. देश को दूसरी हरित क्रांति की आवश्यकता है और बिहार ने इसके लिए पहल की है. अन्य राज्यों को भी इसका अनुसरण कर ऐसा कृषि रोडमैप बनाना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसके लिए बधाई दी और कहा कि राशि महत्वपूर्ण नहीं है समावेशी रणनीति और समेकित प्रयास जरूरी है.

बिहार में अगले पांच वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि कर 225 लाख मीट्रिक टन करने के लक्ष्य के प्रस्तावित कृषि रोड मैप पर 16 जून 2017 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों की राय जानी. मुख्यमंत्री ने राज्य भर से जुटे 1000 से अधिक किसानों के समागम में कहा था कि हमने बिहार में किसानों और कृषि को प्राथमिकता दी है. किसानों के सुझाव पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी. वहीं, पिछले दो कृषि रोड मैप को लागू करने में आयी कमियों पर विशेष ध्यान देगी. बिहार ने धान उत्पादन में रिकार्ड बनाया है. उन्होंने कहा कि सूबे के 76 फीसदी लोग खेती पर निर्भर हैं, इसलिए कृषि से संबंधित क्षेत्रों का भी विकास होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में बिहार की स्थिति खराब है. इसीलिए किसानों की आमदनी बढ़ाना हमारा लक्ष्य है. सरकार को कृषि रोडमैप के तहत निर्धारित योजनाओं को लागू करने हेतु वित्तीय खर्च का आकलन अभी बाकी है. तीसरा कृषि रोड मैप में दलहन व तेलहन उत्पादन बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ बिहार में बीज हब की स्थापना का लक्ष्य है. सिंचित क्षेत्र के विस्तार के लिए कृषि के लिए अलग बिजली फीडर का निर्माण किया जाएगा. कृषि रोडमैप में ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान है. बेहतर कनेक्टिविटी से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और बाजार तक पहुंच आसान हो जाती है. प्रस्तावित कृषि रोडमैप में डीजल की बजाय बिजलीचालित पंप सेट पर विशेष जोर दिया गया है. किसानों को पुआल खेत में जलाने से रोकने के लिए पैडी स्ट्रॉ, ट्रैक्टरचालित चैफ कटर, स्ट्रॉ कंबाइन, स्ट्रॉ बेलर और रैक पर अनुदान देने का प्रस्ताव किया गया है. राज्य में पांच पशु विज्ञान अन्य संस्थान की स्थापना करने और वन क्षेत्र को वर्ष 2022 तक बढ़ा कर 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.

सीएम नीतीश कुमार ने एसोचेम के एक कार्यक्रम में माना था कि किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिये उत्पादकता एवं प्रोसेसिंग आवश्यक है. उन्होंने कहा कि कृषि कार्यों की मॉनीटरिंग के लिये कृषि कैबिनेट बनायी गयी है. बिहार में मक्का का महत्वपूर्ण स्थान है. बिहार में उत्पादित मक्का प्रोसेसिंग के लिये बाहर चला जाता है. उन्होंने कहा था कि प्रोसेसिंग के अभाव में लीची, आम एवं सब्जी अधिक मात्रा में बर्बाद हो जाता है. भारत में 75 प्रतिशत लीची का उत्पादन बिहार में ही होता है. बिहार मखाना का केन्द्र है. मखाना का उत्पादन बिहार में होता है लेकिन इसका व्यापार कानपुर से होता है. बिहार में बेहतर क्वालिटी के पान का उत्पादन होता है. बिहार का दुधिया मालदह आम बहुत प्रसिद्ध है. भागलपुर का जर्दालू आम भी ख्यातिप्राप्त है. हमारे राज्य में आमों का राजा दीघा का दुधिया मालदह है, जबकि लखनऊ की दशहरी आमों की रानी है.

कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक, नये रोडमैप में लागत कम करने के लिए खासतौर पर इनपुट सब्सिडी पर जोर होगा. राज्य सरकार का जोर इससे किसानों की लागत को कम करने पर होगा. इसमें भी जमीन के हिसाब से किसानों को अनुदान दिया जाएगा. राज्य सरकार किसान की परिभाषा मे भी बदलाव कर सकती है. इसके तहत अब भूमि के मालिकों के साथ-साथ खेती करनेवालों को भी शामिल किया जा सकता है. साथ ही इस रोडमैप में किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ फूल, सब्जी, पशुपालन, मत्स्यपालन और मधुमक्खी पालन आदि को भी जोड़ा जाएगा. राज्य सरकार भूमि सुधार पर भी जोर दे रही है. इसके तहत चकबंदी और जमीन के सर्वेक्षण का काम नये सिरे से हो रहा है. जमीन के रिकॉर्ड के नवीकरण पर भी सरकार ध्यान देगी, जिससे भूमि विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी. किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से रूबरू कराया जाएगा और उन्नत बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा. हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि राज्य सरकार किसी भी तरह से जीन प्रसंस्कृत बीजों को राज्य में आने का मौका नहीं देगी.

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि दूसरा कृषि रोड मैप (2012–17) अपने सभी मानकों पर फेल रहा है. डीजल अनुदान के भुगतान और कृषि यंत्रीकरण में भी सरकार विफल रही है. मोदी ने कहा कि कृषि रोड मैप के फेल होने, सरकार द्वारा किसानों की उपज की खरीद नहीं होने से बिहार के किसानों की हालत खस्ता है. बिहार के 39 लाख किसानों पर 21,615 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण हैं. ऐसे में सरकार को किसानों के कर्ज को माफ करने के साथ ही उन्हें आगामी फसलों के लिए ब्याजरहित ऋण देना चाहिये.

कृषि रोडमैप की शुरुआत 2007 में राज्य में कृषि उत्पाद में इजाफा, नई तकनीकों के प्रचार-प्रसार और किसानों की कमाई में इजाफे के उद्देश्य से हुई थी. इसके पहले संस्करण के बेहतर नतीजे देखते हुए राज्य सरकार ने 2012 में इसके दूसरे संस्करण को मंजूरी दी थी. खुद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इसका उद्घाटन किया था. इसके तहत राज्य सरकार ने करीब 1.52 लाख करोड़ रुपये के निवेश से बिहार में कृषि के तेज विकास का वादा किया था. बिहार में खाद्यान्न उत्पादन 2.52 करोड़ टन करने का लक्ष्य निर्धारित हुआ था. अकेले धान का उत्पादन 1.5 करोड़ टन के स्तर पर लाने की बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी. बिहार ने जब 2008-2012 के लिए पहला कृषि रोडमैप बनाया था, तब उस समय 1980-81 व 1990-91 के बीच दर्ज 4.9 फीसदी की विकास दर की जगह ग्रोथ रेट 11 प्रतिशत था. 2012-17 के लिए बना दूसरा कृषि रोडमैप अगले पांच सालों में सूबे के विकास दर को 13 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया था. पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कहा करते थे-‘एवरी थिंग कैन वेट, बट एग्रीकल्चर कैन नाट वेट.’ (हर चीज रोकी जा सकती है, लेकिन कृषि इंतजार नहीं कर सकती). देश में पहली हरित क्रांति पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हुई थी. उस समय सी. सुब्रह्मणियम कृषि मंत्री थे. तब, गंगा के किनारे बसे राज्यों को इसका बहुत लाभ नहीं मिला था.

  • अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क
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Appan Samachar Desk

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