जलसंकट के बीच खुले में शौच के खिलाफ लड़ाई

देश को 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 6.4 करोड़ परिवारों के लिए शौचालय का निर्माण करना होगा. लेकिन हो सकता है कि यह संख्या और भी अधिक हो, क्योंकि करीब 79 लाख मौजूदा शौचालय उपयोग नहीं किए जा सकने की दिशा में हैं. भारत को खुले में शौच मुक्त होने के लिए चार गरीब राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, ओड़िसा और झारखण्ड पर खास ध्यान देने की जरूरत है. सीएसई का अध्ययन बताता है कि ये चारों राज्य भारत में ऐसे लोगों की आबादी का 60 फीसदी अपने में समाहित करते हैं जो खुले में शौच करते हैं. जब तक ये राज्य खुले में शौच मुक्त नहीं हो जाते हैं, विश्व व भारत खुले में शौच मुक्त होने के अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता है.
संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट 2014 के अनुसार, खुले में शौच करने वाले एक बिलियन लोगों में से 60 फीसदी लोग तो भारत से हैं. एक ओर जहां भारत ने वर्ष 2019 तक खुले में शौच मुक्त होने का संकल्प लिया है, दुनिया ने वर्ष 2030 तक खुले में शौच मुक्त होने के लिए सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. – जारी

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Siddhant Sarang

Appan Samachar

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