सूरजमुखी व तिल की बोआई को तैयार करें खेत

मुजफ्फरपुर. अभी दलहनी व तेलहनी फसलों की बोआई का उचित समय चल रहा है. किसान इन फसलों की बोआई के लिए खेतों की तैयारी करें. बीज बोआई से पूर्व इन्हें उपचारित करना जरूरी है. इससे उत्पादन पर अच्छा असर पड़ेगा. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम परामर्शी सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ ए सत्तार ने बताया कि किसान अरहर, तिल व सूर्यमुखी की बोआई के लिए खेत की तैयारी करें. खेत की जुताई में गोबर की खाद / कंपोस्ट का अधिक से अधिक प्रयोग करें. इससे भूमि की जलधारण क्षमता व पोषक तत्व की मात्रा बढ़ती है, जो किसान मक्का, ओल, हल्दी व अदरक की रोपाई नहीं किये हैं, वे अतिशीघ्र रोपनी करें. भिंडी, लौकी, नेनुआ, करैला, खीरा जैसी बरसाती सब्जियों की बोआई करने का बेहतर समय है. मध्यम अवधि के धान के किस्मों को बीजस्थली में गिराने का उपयुक्त समय चल रहा है. संतोष, सीता, सरोज, राजश्री, प्रभात, राजेंद्र सुवासनी, राजेंद्र कस्तुरी, राजेंद्र भगवती, कामिनी, सुगंधा  किस्में बेहतर हैं. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपनी के लिए 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में नर्सरी तैयार करें. 10 से 12 दिनों के बिचड़े वाली नर्सरी से खरपतवार निकाल दें. प्याज में एन-53, एग्रीफाउंड डार्क रेड, अर्का कल्याण, भीमा सुपर खरीफ प्याज के लिए बेहतर हैं. बीज को केप्टन या थीरम/ 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बीजोपचार कर लें. बीज की दर 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए छायादार नेट से 6 से 7 फीट की ऊंचाई पर ढंक दें. 

ऊमस व नमी से बढ़े परजीवी रोग

पशुओं में परजीवी रोग ऊमस व अधिक तापमान के कारण बढ़ गये हैं. अठगोड़वा थलेरियोसीस, ट्रिपैनोसोमिएसीस व बबेसियोसीस जैसे घातक रक्त परजीवी रोगों के वाहक हैं. नियंत्रण के लिए आइवरमेक्टीन, फ्लूमूेथ्रिन, अमितराज, इप्रिनोमेक्टीन दवाओं का प्रयोग करें. पशुओं के शरीर में दवा लगाने का काम सुबह या शाम में करें. धूप में दवा नहीं लगायें. दवा लगाने के  दो घंटे बाद पशुओं को ठंडे पानी से धो दें. दवा का प्रयोग पशुओं के सिर या गरदन में नहीं करें. पशुओं में दवा लगाने के बाद उसी दिन 30 मिलीलीटर अमितराज या इप्रिनोमेक्टीन दवा को दाे लीटर पानी में घोल कर पशुगृह में छिड़काव अवश्य  करें. पशुगृह में सुखा चुना का घना छिड़काव करें.  यह खबर दोबारा पढ़ी गयी है.

किसानों को मिलेगी खरपतवारनाशी व पौधा संरक्षण की दवा 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से किसानों को खेती करने के िलए मदद मिलेगी. किसानों को छूट पर जरूरत के हिसाब से सूक्ष्म पोषक तत्व व खरपतवारनाशी दवा मुहैया करायी जायेगी. पौधा संरक्षण की औषधि भी किसान प्राप्त कर सकते हैं. जिले के किसान 8213 हेक्टेयर जमीन के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व, खरपतवारनाशी दवा और पौधा संरक्षण की दवा खरीद करेंगे. इस मद में कृषि विभाग 41 लाख रुपये खर्च करेगा. डीएओ विकास कुमार ने हमारे कम्युनिटी रिपोर्टर को बताया कि सभी प्रखंडों के लिए राशि व क्षेत्रफल का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है. लाभुक किसानों को तीनों चीजों के उठाव पर एक हेक्टेयर में 500 रुपये का अनुदान मिलेगा. कृषि विभाग के अनुसार, सूक्ष्म पोषक तत्व का वितरण 3956 हेक्टेयर के लिए होगा. इस पर किसानों को 19,78,000 रुपये की छूट मिलेगी. पौधा संरक्षण रसायन व बायोएजेंट वितरण का लक्ष्य 1935 हेक्टेयर के लिए किया जायेगा. इस पर 967500 रुपये खर्च होगा. खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव 2322 हेक्टेयर में किया जायेगा. इस मद में कृषि विभाग को 1161000 रुपये खर्च करना होगा. किसान जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर इन योजनाओं का लाख उठा सकते हैं. 

इनपुट : कम्युनिटी रिपोर्टर

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