नेताजी ने मोतिहारी व मुजफ्फरपुर के लोगों में भरा था जोश

जयंती के बहाने नेताजी को याद करना अतीत की यात्रा करने जैसा है. सुभाषचंद्र बोस ने देश को फिरंगियों से आजाद कराने के लिए सिविल सेवा की नौकरी छोड़ दी. उड़ीसा के कटक में 23 जनवरी 1897 को एक बंगाली परिवार में सुभाष का जन्म हुआ था. अपने माता-पिता के कुल 14 पुत्र-पुत्रियों के बीच सुभाष नौंवी संतान थे. उनके पिता मशहूर वकील थे.
आजाद हिंद फौज के सिपाही सुभाष चंद्र बोस उस दौर में बिहार के दौरे पर भी आये थे. मुजफ्फरपुर व चंपारण में उन्होंने आजादी के दीवानों का हौसला बढ़ाया था. मुजफ्फरपुर के बुन्नी बाजार व पूर्वी चंपारण के नागरिक पुस्तकालय से उनकी यादें जुड़ी हैं. नेताजी सुभाषचंद्र बोस 1940 में पूर्वी चंपारण आये थे. मिस्कॉट में देवीलाल साह के घर पर हुई स्वागत सभा के पश्चात गांधी चौक के पास लोगों को संबोधित किया था. आज जहां सुभाष पार्क है, वह जगह उस समय एक खुला मैदान था. मोतिहारी के देवप्रिय मुखर्जी बताते हैं कि वे उस वक्त बिहार के दौरे पर थे. कांग्रेस से अलग होने के बाद फाॅरवर्ड ब्लाॅक की स्थापना करने व अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को मजबूती देने के उद्देश्य से पहले चंपारण (पूर्वी व पश्चिमी) के मेहसी पहुंचे थे. मेहसी में लाइब्रेरी में उनका भव्य स्वागत किया गया था. मेहसी के नागरिक पुस्तकालय के विजिटर बुक में आज भी उनके लिखे शब्द व हस्ताक्षर सुरक्षित हैं. उनके समर्थकों में अमर शहीद रामावतार साह जैसे लोग भी शामिल थे.

रामबृक्ष बेनीपुरी व स्वामी सहजानंद के साथ

सुभाषचंद्र बोस और नाना श्री रामबृक्ष बेनीपुरी. साथ में स्वामी सहजानंद सरस्वतीजी (नेताजी के जन्मदिवस पर एक अनोखी तस्वीर ). बेनीपुरी जी आज़ाद दस्ता के संचालक भी थे और हथियार के बल पर नेपाल के थाने से लोहिया जी को छुड़ा कर लाये थे. इनके साथ उस समय सूरज नारायण सिंह भी थे.

– महंथ राजीव रंजन दास के फेसबुक वॉल से