जब मंत्रीजी कंधे पर बोरा लेकर नंगे पांव चल पड़े जनता के बीच

बेतिया. क्या कभी आपने किसी मंत्री को कंधे पर बोरा लाद नंगे पांव चल कर जनता की सेवा करते देखा है? आपदा की घड़ी में अमूमन नेता लोग उस इलाके का दौरा कर सरकारी कोरम पूरा कर लौट जाते हैं. घड़ियालू आंसू बहा कर पीड़ितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने का अभिनय भी करते हैं, लेकिन क्या प्राकृितक आपदा के समय कोई मंत्री-विधायक पीड़ित जनता के बीच रहकर दिन-रात एक स्वयंसेवक की भांति सेवा में लगा रहता है? और वह भी कई-कई दिनों तक. आप कहेंगे, शायद नहीं. लेकिन मैं कहता हूं कि ‘हां’. बिहार में एक ऐसा नेता है, जो मंत्री पद की ठसक को किनारे करते हुए बाढ़पीड़ितों की सेवा में जुटा है और वह भी किसी प्रचार-प्रसार के. उस मंत्री का नाम है ‘खुर्शीद उर्फ फिरोज आलम’. खुर्शीद आलम बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा से जदयू के विधायक हैं. वे जदयू-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री हैं. बिहार सरकार के गन्ना उद्योग व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद आलम पिछले पांच-छह दिन से लगातार अपने क्षेत्र में बाढ़पीड़ितों के बीच मुस्तैद हैं. पीड़ितों के बीच राहत सामग्री पहुंचाने का इंतजाम करने से लेकर जुटाने में अपने सहयोगियों के साथ लगे हैं. यहां न मंत्री का रुतबा दिखता है और न प्रोटोकॉल का घेरा. एक खांटी स्वयंसेवक की तरह भूख से बिलबिलाते लोगों तक खुद राहत सामग्री से भरा बोरा लेकर पहुंच जा रहे हैं. रविवार के दिन भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ गाड़ी पर राहत सामग्री लेकर बाढ़ग्रस्त इलाकों में निकले थे. आगे पानी ही पानी था. बस क्या था, खुद मंत्री महोदय ने अपने कंधे पर राहत सामग्री से भरे बोरे को लाद कर नंगे पांव चल दिये. यह देख पार्टी कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं ने भी उनका साथ दिया. मंत्रीजी के इस जज्बे व भलमनसाहत की चहुंओर प्रशंसा होने लगी. बता दें कि मंत्रीजी को जैसे ही जिले में बाढ़ आने की सूचना मिली, अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर क्षेत्र में चले आये. मंत्री खुर्शीद आलम कहते हैं कि वह आदमी ही क्या, जो संकट की घड़ी में एक इंसान के काम नहीं आये.

‘जयश्री राम’ का नारा लगाने पर आये थे सुर्खियों में
ये वही मंत्री हैं, जिन्होंने पिछले महीने नवगठित एनडीए सरकार के विश्वास मत के दाैरान बिहार विधानसभा परिसर में ‘जयश्री राम’ व ‘वंदे मातरम’ का नारा लगा कर राजनीतिक हलकों में भूचाल खड़ा कर दिया था. मुसलिम समुदाय की आलोचना सहनी पड़ी थी. मंत्री ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा था कि अगर जयश्री राम कहने से बिहार के दस करोड़ जनता का फायदा होता है, तो मैं सुबह-शाम जयश्री राम कहूंगा. इतना कहते ही बहस-मुबाहिसों का दौर शुरू हो गया. पटना में इमारते शरिया ने मंत्री को फतवा जारी किया. बाद में मंत्री के माफी मांगने के बाद मामला ठंडा पड़ा.

-अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

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