दूध सस्ता और पानी महंगा

मुजफ्फरपुर. सरकारें मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते व सुख- सुविधाएं तो बढ़ाती जा रही हैं, लेकिन सुबह चार बजे से रात्रि के दस बजे तक कड़ी मेहनत कर औने-पौने दाम में दूध बेचनेवाले दुग्ध उत्पादकों के हित की बात कोई नहीं कर रहा है. गाय-भैंस का दूध बच्चों के आहार, सुबह की चाय, दही, पनीर, लस्सी, मिठाई, रेवड़ी आदि में उपयोग होता है. सोचिये, गाय महंगी, भैंस महंगी, चारा, पशुओं की दवाएं आदि सभी चीजें महंगी. लेकिन दूध सस्ता क्यों? पानी की कीमत से भी कम दाम में दूध खरीद कर कारोबारी व व्यापारी मालामाल हो रहे हैं. अहले सुबह से देर रात तक मेहनत करनेवाला पशुपालक बदहाली में जीवन गुजार रहा है. उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा तक नसीब नहीं हो रही है. पढ़िए किसानों की पीड़ा की पड़ताल करती यह रिपोर्ट…

भूसा महंगा, दवा महंगी, फिर दूध सस्ता क्यों‍?
मुरौल दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति कार्यालय के पास किशुन राय खड़े थे. चिल्ला-चिल्ला कर बोल रहे थे. भाई पानी के भाव में दूध ले लो. पानी के भाव में दूध ले लो. 20 रुपये लीटर पानी है. 21 रुपये लीटर दूध देंगे. आइए, दूध लीजिए. दूध लीजिए. इनके ही स्वर में शशि भूषण कुमार कन्हैया कुमार भी बोलने लगे. पानी के भाव में दूध देंगे. पानी के भाव में दूध ले लो. लेकिन, यहां पशुपालकों की संख्या ज्यादा थी. ग्राहक नहीं थे. इनका दूध किसी ने नहीं लिया. पूछने पर बोले, इसका उपयोग किसी दूसरे काम में करेंगे. तीनों किसानों ने कहा, सातवें वेतनमान में दूध सस्ता हो गया है. गाेपालन व भैंस पालन की पटना में ट्रेनिंग ली थी. बोला गया था कि एक दुधारू पशु को पांच किलो भूसा, आठ किलो हरा चारा, चार किलो दाना एक बार का भोजन निर्धारित है. इसकी कीमत अमूमन 150 रुपये होती है. ऐसी खुराक सुबह व शाम का निर्धारित है. यानी, एक दिन में एक दुधारू पशु को 300 रुपये का दाना-पानी देना पड़ता है. साथ में एक व्यक्ति इसकी देखरेख में लगा रहता है. मेहनत व इस व्यवसाय में लगी पूंजी भी ऊपर नहीं हो पाता है. सौ फीसदी पक्का सौदे का खरीदार नहीं मिलता है. कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. किसानों का कहना है कि सरकार को पशुपालन में होनेवाले खर्च व किसानों की मेहनत के अनुसार दूध की कीमत तय करे.

आठ फीसदी छेना से कम वाले दूध का कोई मूल्य नहीं
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के अनुसार, गाय के दूध में फैट 3.0 से लेकर 5.4 प्रतिशत तक होता है. एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) आठ से लेकर 8.5 प्रतिशत होता है. गाय के दूध का न्यूनतम मूल्य 20.11 रुपये से लेकर 30.62 रुपये है. साथ ही, आठ प्रतिशत एसएनएफ से कम पाये जाने पर किसानों को कोई भुगतान नहीं होगा.

भैंस में कम छेना पर मिलती गाय के बराबर दूध की कीमत
वहीं, बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन, पटना के अनुसार, भैंस के दूध में 5.5 से लेकर 10 फीसदी तक फैट होता है. एसएनएफ 8.5 से लेकर 8.8 प्रतिशत होता है. भैंस के दूध का न्यूनतम कीमत 30.39 रुपये प्रतिलीटर है. तो सबसे ज्यादा मूल्य 56.97 रुपये है. भैंस के दूध में 8.4 एसएनएफ होना चाहिए. इससे कम एसएनएफ होने पर गाय के दूध के अनुसार भुगतान होगा.

तीन फीसदी से कम फैट वाला दूध नहीं लेता तिमुल
सबसे चौंकानेवाली बात है कि सुधा स्मार्ट डबल टोंड मिल्क में 1.5 प्रतिशत फैट और 9.0 प्रतिशत एसएनफ निर्धारित है और इसकी 32 रुपये प्रति लीटर है. लेकिन, किसानों से तीन प्रतिशत फैट से नीचे का दूध खरीद नहीं की जाती है. इससे किसानों को ज्यादा परेशानी है. किसानों का कहना है जर्सी गाय व नयी बिआन की गाय में फैट कम होता है.

क्या कहते हैं जानकार

  • 1. तिमुल के पूर्व अध्यक्ष राम संजीवन राय कहते हैं कि गाय के दूध में एसएनएफ 8.4 प्रतिशत से कम होने पर भुगतान का अनुपात कम हो जाता है. वहीं, आठ प्रतिशत से कम होने पर कोई भुगतान नहीं है. आठ प्रतिशत होने पर कुल कीमत का 80 फीसदी ही भुगतान निर्धारित है. यह सब दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ी परेशानी है. वहीं, दुग्ध समितियां व बाजार के बीच दूध में कीमत का अंतर 10 से 12 रुपये तक हो जाता है. सहकारी संघों ने इनपुट दर व पशुपालकों के लागत खर्च के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब से दो रुपये खींचने की व्यवस्था कर ली. लेकिन, इसका लाभ पशुपालकों को नहीं मिला. इन्हें अमूमन 20 से 40 पैसे के बीच लाभ हुआ है.
  • भारतीय किसान मोर्चा के जिला संयोजक वीरेंद्र राय का कहना है कि किसानों से दूध उठाव की कीमत अन्यायपूर्ण तरीके से निर्धारित है. न सरकारों को किसानों की पूंजी की चिंता है, न ही इसके पालन में आनेवाली लागत की. उनकी मेहनत तो दूर की बात. पानी के भाव में दूध खरीद की जा रही है. एक ओर सरकारी कर्मियों को आयोग गठित कर सातवें वेतन दिये जा रहे हैं. वहीं, पशुपालकों का दूध पानी के भाव में खरीदारी हो रही है. किसानों को सड़क पर उतरने के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है.

अच्छी क्वालिटी के दूध को देते हैं ज्यादा कीमत
तिमुल के अध्यक्ष नागेश्वर राय ने बताया कि फैट व छेना की मात्रा पर दूध का दाम तय होता है. अच्छी क्वालिटी के दूध पर अधिक कीमत देते हैं. गाय के दूध में फैट व छेना कम होता है, इसलिए उन्हें कम दर पर भुगतान किया जाता है. जहां तक बाजार दर में दो रुपये बढ़ाने का सवाल है, तो वह इनपुट लागत व किसान दोनों का हिस्सा है. किसी एक का नहीं है.

फैट-एसएनफ-किसानों से खरीद दर (प्रतिलीटर )-समिति व बाजार दर में अंतर (रुपये में)
6.0-8.8 से 9.0- 34.18-10.82
4.5-8.5-28.13-10.87
3.5-8.5-25.37-11.63
3.0-8.5-23.98-11.02

दूध-दूध का प्रकार-फैट-एसएनफ-कीमत (प्रतिलीटर)
सुधा गोल्ड- फुल क्रीम दूध-6.0-9.0-45
सुधा गोल्ड- सुधा शक्ति-4.5-8.5-39
सुधा गोल्ड- गाय दूध-3.5-8.5-37
सुधा हेल्दी- टोंड दूध- 3.0-8.5-35
सुधा स्मार्ट- डबल टोंड मिल्क-1.5-9.0-32

 

– अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

 

 

Facebook Comments

Appan Samachar Desk

Appan Samachar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *