हमारे गांधी को सलाम करती है दुनिया

 

जिस महात्मा गांधी को आज देश की कुछ कट्टरपंथी ताकतें, यहां तक कि एक खास विचारधारा की सरकारें भी भुलाने का कुत्सित प्रयास कर रही हैं, उस महामानव और सत्य व अहिंसा के पुजारी को दुनिया सलाम करती है. आखिर उस गांधी में वह क्या खास चीज थी कि दुनिया के महान नेताओं, विचारकों और वैज्ञानिकों को प्रभावित करती थी और आज भी कर रही है. क्या गांधी को कभी इतिहास के पन्नों से मिटाया जा सकता है? इस सवाल का जवाब गांधी के उन घोर विरोधियों के पास भी नहीं हैं, जो बापू के बारे में आज की युवा पीढ़ी के दिमाग में दकियानूसी विचार भरने में लगे हैं. कट्टरता और नफरत भरे इस माहौल में गांधी और प्रासंगिक हो उठते हैं.
शहादत दिवस पर अप्पन समाचार की ओर से गांधीजी को कोटि-कोटि श्रद्धांजलि !

गांधी के बारे में दुनिया के महान लोगों ने क्या कहा

  • दो अक्टूबर, 1944 को महात्मा गांधी के 75वें जन्मदिवस पर आइंस्टीन ने अपने संदेश में लिखा था – ‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था.’ यह वाक्य गांधी को जानने-समझने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक सूत्रवाक्य ही बन गया और आज भी इसे विभिन्न अवसरों पर उद्धृत किया जाता है.
  • आइंस्टीन के आदर्श श्वाइटज़र स्वयं महात्मा गांधी के बारे में क्या सोचते थे. श्वाइटज़र ने भारत पर केंद्रित अपनी पुस्तक ‘इंडियन थॉट एंड इट्स डेवलपमेंट’ में लिखा- ‘गांधी का जीवन-दर्शन अपने आप में एक संसार है’. उन्होंने आगे लिखा- ‘गांधी ने बुद्ध की शुरू की हुई यात्रा को ही जारी रखा है. बुद्ध के संदेश में प्रेम की भावना दुनिया में अलग तरह की आध्यात्मिक परिस्थितियां पैदा करने का लक्ष्य अपने सामने रखती है. लेकिन गांधी तक आते-आते यह प्रेम केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि समस्त सांसारिक परिस्थितियों को बदल डालने का कार्य अपने हाथ में ले लेता है.’
  • भारत में जन्मे ब्रिटिश लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने 1949 में एक लेख लिखा था, ‘रिफ्लेक्शन्स ऑन गांधी’. इसमें जॉर्ज ऑरवेल ने लिखा था, ‘संतों को हमेशा तब तक दोषी माना जाना चाहिए, जब तक वो बेगुनाह न साबित हो जाएं. लेकिन उनकी बेगुनाही साबित करने के लिए जो पैमाने लागू होंगे, वो आम लोगों के लिए लागू होने वाले पैमानों से अलग होंगे. गांधी के बारे में ये सवाल उठता है कि आखिर उन्हें खुद पर कितना घमंड था. सिर्फ एक धोती पहनने वाला अधनंगा फकीर, जो एक चटाई पर बैठकर साम्राज्यों को हिला रहा था, उस गांधी को अपनी आध्यात्मिक शक्ति पर कितना गुरूर था. गांधी ने राजनीति में जाकर अपने सिद्धांतों से कितना समझौता किया. उस राजनीति में गए जो दबाव, ब्लैकमेल और फर्जीवाड़े से की जाती है?
  • अमेरीका के मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा से 2009 में वेकफील्ड हाई स्कूल में जब पूछा गया की अगर आपको किसी भी जिंदा या मुर्दा व्यक्ति के साथ डिनर करना हुआ तो वह कौन होगा? इस पर ओबामा मुस्कुराएं और जवाब दिया “खैर, जिंदा या मुर्दा, यह एक बहुत बड़ी बात है. लेकिन मुझे लगता है कि वह गांधी जी होंगे, जो की मेरे असली हीरो है.
  • नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने 2012 में न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि गांधीजी के विचारों का प्रभाव उनके जीवन में प्रमुख प्रभावों में से एक है.
  • दक्षिण अफ्रीका के पूर्व प्रेसिडेंट नेल्सन मंडेला, महात्मा गांधी को अपना सबसे बड़ा गुरु कहते थे. वह कहते थे कि गांधी के विचारों ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद आदि परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
  • अमेरिकन प्रेसिडेंट रूजवेल्ट ने इस बात में संदेह नहीं कि गांधी में महान आध्यात्मिक गुण थे और एकमात्र उम्मीडी. हालांकि, वह अपने लोगों के बीच में नहीं है, यह है कि उनका प्रभाव ‘विश्व को देने` के गुण के कारण है और हमें आशा है कि उनकी हत्या लोगों को हिंसा से विमुख करेगी.
  • डॉ. मार्टिन लूथर किंग (जूनियर) ने कहा था क़ि अन्य लोगों की तरह मैंने भी गांधी को सुना था, पर मैंने गंभीरता से उनका अध्ययन नहीं किया. जब मैंने पढ़ा तो अहिंसक प्रतिरोध के उनके अभियान से काफी प्रभावित हुआ. सत्याग्रह का पूरा सिद्धांत गहराई में मुझमें समाया. गांधी संभवतः इतिहास में पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ईसा के ‘प्रेम` के संदेश को व्यक्तियों से लेकर ताकतवर और सामाजिक ताकतों से बड़े पैमाने पर बातचीत के जरिए फैलाया, जिस बौद्धिक एवं नैतिक संतोष को मैं बेंथम एवं मिल के उपभोगवाद, मार्क्स और लेनिन की वंति, हॉब्स के सामाजिक संबंध सिद्धांत, रूसो के ‘प्रछति की ओर लौटो` के आशावाद और नीत्से के सुपरमैन फिलॉसॉफी में नहीं पा सका – मुझे गांधी के अहिंसक-प्रतिरोध दर्शन में वह मिला. अगर मानवता को प्रगति करनी है तो गांधी को भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने विश्वशांति एवं सद्भाव को मानवीय दृष्टि से देखा, उससे प्रेरित हुए और वैसा ही सोचा, किया तथा जिया. हम अपने अस्तित्व की कींमत पर ही उनकी उपेक्षा कर सकते हैं.
  • रोमाँ रोला ने कहा, ‘गांधी केवल भारत के राष्टींय इतिहास के नायक ही नहीं हैं, जिनकी महान स्मृतिया लोगों को रोशन करती रहेंगी, बल्कि पश्चिमी दुनिया के लिए भी गांधी ने, ईसा के संदेशों को जो भुला दिये गए थे -पुनर्जीवित किया. अनेक लोगों के लिए वे ईसा का ही अवतार थे। स्वतंत्र चिंतको तथा दूसरों के लिए गांधीजी रूसो और टॉलस्टाय का ही विस्तार थे जिन्होंने सभ्यता के अपराधों तथा भ्रमों को तोड़ा और मनुष्य को प्रगति, साधारण जीवन और स्वास्थ्य की ओर उन्मुख किया.`
  • लॉर्ड रिचर्ड एटनबरो ने कहा था, जब महात्मा गांधी से यह पूछा गया कि मनुष्य के किस गुण की वे प्रशंसा करते हैं तो उन्होंने तुरंत ,सरलतापूर्वक उत्तर दिया – हौंसला. उन्होंने कहा- अहिंसा कायरता छिपाने की ढ़ाल नहीं हैं. यह तो बहादुरों का हथियार है.
  • लुईस फिशर ने कहा था, एक अर्धनग्न बूढ़ा जो ग्रामीण भारत में बसता था,उसके निधन पर मानवता रोई.
  • दलाई लामा कहते है कि गांधीजी मानव प्रकृति की एक गहरी समझ के साथ एक महान इंसान थे. उनके जीवन ने मुझे प्रेरित किया है.