पर्यावरण पर 10 किताबें लिख चुके मुजफ्फरपुर के चंद्रभूषण

मुजफ्फरपुर के एक छोटे से गांव चैनपुर (मड़वन) में श्य़ाम किशोर सिंह के घर जन्मे चंद्रभूषण पर्यावरण के क्षेत्र का आज एक जाना-पहचाना नाम है. चंद्रभूषण का बचपन गांव में ही बीता. प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा मुजफ्फरपुर के संत जेवियर्स एकेडमी, जूरन छपरा में हुई. चंद्रभूषण ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक व इन्वायरमेंटल प्लानिंग में एमटेक करने के बाद गुजरात में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया. इसी क्रम में अहमदाबाद में देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट (सीएसइ) के संस्थापक अनिल अग्रवाल के संपर्क में आये. इसके बाद दिल्ली पहुंचे और सीएसइ से जुड़कर धरती बचाने के प्रयास में जुट गये. फिलवक्त सीएसइ में बतौर डिप्टी डायरेक्टर जनरल चंद्रभूषण अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं. वर्ष 2015 में 30 नवंबर से 11 दिसंबर तक पेरिस में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में सीएसइ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करनेवाले चंद्रभूषण अबतक कई देशों की यात्रा कर चुके हैं. चंद्रभूषण कहते हैं कि आज जरूरत इस बात पर विचार करने कि है कि कैसे दुनिया से असमानता घटे. वे कहते हैं कि हमारी आजीविका पर्यावरण पर निर्भर है. जल प्रदूषित होने पर मत्स्यपालन पर असर पड़ेगा. मिट्टी की सेहत खराब होगी, तो फसलों की उपज कम होगी. जंगल कटेगा, तो गरीबों को खाना पकाने को लकड़ी नहीं मिलेगी. हमें समझना होगा कि पर्यावरण संरक्षण कितना जरूरी है. 
पर्यावरण व विकास पर 10 से अधिक पुस्तकें

चंद्रभूषण ने पर्यावरण व विकास पर आधारित अंगरेजी में 10 से अधिक शोधपरक किताबें लिखी हैं, जिनमें फूड एज टॉक्सिन, फेसिंग द सन, गोइंग रिमोट, हिट ऑन पावर, रीच लैंड, पूअर पीपल : इज सस्टेनेबल माइनिंग पॉसिब्ल आदि प्रमुख हैं. वे सीएसई की पत्रिका ‘डाउन टू अथ’ के कंसल्टिंग एडिटर भी हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं. भारत सरकार के अलावा कई देशों की सरकारों के साथ जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं. चंद्रभूषण नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर ट्रेनिंग एंड एडुकेशन एव ब्यूरो ऑफ इंडिया स्टैंडर्ड के सदस्य रह चुके हैं. भारत की पंचवर्षीय योजना की ड्राफ्टिंग कमेटी का भी हिस्सा रहे.
काम का असर

चद्रभूषण बताते हैं कि खदान पर किये गये मेरे काम के कारण सभी माइनिंग डिस्ट्रिक्ट में डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन (डीएमएफ) का गठन किया गया. इसके तहत खदान की कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा गरीबों की सहायता के लिए डीएमएफ में जमा हो रहा है. इसी तरह पेय व खाद्य पदार्थो जैसे-शॉफ्ट ड्रिंक, चिकेन, मधु आदि में मौजूद कीटनाशी व प्रतिजैविक तत्वों पर मेरे काम के बाद खाद्य सुरक्षा के मानकों में बदलाव किया गया.
कांटी थर्मल पावर को ले चिंता  
वे कहते हैं कि कोयला से बिजली पैदा करनेवाले प्लांट के पर्यावरण मानक में सुधार लाने के लिए उर्जा मंत्रालय व पावर प्लांट के खिलाफ हमने संघर्ष किया है. मुजफ्फरपुर के कांटी थर्मल पावर को लेकर भी वे चिंतित हैं. कहते हैं कि कांटी की हवा काफी प्रदूषित हो गयी है. प्रदूषण कम करनेवाली तकनीक उपलब्ध है, लेकिन पावर प्लांट इसके इस्तेमाल को ले इच्छुक नहीं है. हमें इसपर भी काम करना है.

-अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

 

 

Facebook Comments

Appan Samachar Desk

Appan Samachar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *