महिलाओं के आत्मसम्मान पर ओडीएफ का हंटर चलवा रहे डीएम

सीतामढ़ी. स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने डंडे चलाना शुरू किया है. अब आप अपनी मर्जी से शौच भी नहीं कर सकते हैं. इसी तरह कभी जनसंख्या नियंत्रण के लिए लोगों को जबरदस्ती पकड़-पकड़ कर नसबंदी करने का अभियान चलाया गया था. घोर विरोध के बाद अंतत: शासन-प्रशासन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था. कुछ उसी रास्ते पर आज गांवों को स्वच्छ बनाने का अभियान चलाया जा रहा है. डंडे के बल पर कोई प्रशासन लोगों की मानसिकता नहीं बदल सकता. हां, आंकड़ों की फर्जी बाजीगरी कर वाहवाही जरूर लूटा जा सकता है. 

ताजातरीन मामला सीतामढ़ी से जुड़ा है. प्रशासन ने जिले को तय लक्ष्य के भीतर ओडीएफ (खुले में शौच) घोषित कराने के लिए लोगों पर हंटर चलाना शुरू किया है. टीम ने एक हफ्ते में 667 लोगों को खुले में शौच करते पकड़ा, जिनमें चार को जेल में डाल दिया और 663 को जुर्माना वसूल कर छोड़ा. मॉर्निंग फॉलोअप कार्यक्रम के तहत डीएम राजीव रौशन के नेतृत्व में अधिकारियों व कर्मियों की टीम सुबह ही निकल जाती है गांवों की ओर और खुले में शौच करते लोगों को पकड़ कर थाने ले आती है. महिलाओं को भी नहीं छोड़ा जाता है. 30 जुलाई तक जिले के 273 पंचायतों में 236 पंचायतों को ओडीएफ घोषित किया गया है. जिला जल एवं स्वच्छता समिति के साथ विमर्श के बाद डीएम ने इस अभियान काे नया नाम दिया है, ‘स्वच्छता चक्र प्रवर्तन’. कुल मिला कर जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. शिक्षकों को भी शिक्षण कार्य से इतर इस अभियान में लगाया गया है.

ललिता देवी, आदापुर दक्षिणी पंचायत, पुपरी

महिलाओं से भी जोर-जबरदस्ती
25 जुलाई को कुसमी, सुनीता, सुमित्रा समेत कई महिलाओं को खुले में शौच करते पकड़ कर धर-पकड़ टीम ने पुपरी थाने पर ले आयी. प्रशासन की इस जोर-जबरदस्ती पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया. ग्रामीणों में आक्रोश इतना बढ़ गया कि तीन दिन बाद ही चोरौत प्रखंड के यदुपट्टी में टीम पर महिलाओं ने हमला कर दिया. चोरौत पश्चिमी पंचायत के उपमुखिया  राजीव पासवान से दुर्व्यवहार किया और प्रेरक किशुन साह की पिटाई कर दी.  पुपरी के गणेश यादव व गणेशी राम ने कहा कि यह प्रशासन का हिटलरशाही रवैया है. वे कहते हैं कि अपराधियों को पकड़ने में नाकाम पुलिस लोगों को परेशान कर रही है. बिना महिला पुलिस की मदद के महिलाओं को पकड़ना कानूनन अपराध है. पुपरी प्रखंड के आदापुर दक्षिणी पंचायत के धनंजय कुमार कहते हैं कि मेरा पंचायत ओडीएफ घोषित है, लेकिन शौचालय का निर्माण 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ है. शौचालय के नाम पर गरीबों का शोषण हो रहा है. उन्हें अपमानित किया जा रहा है. इसी पंचायत की ललिता देवी बताती है कि मेरा शौचालय अभी बन ही रहा है. इसके बावजूद मुझे भी पकड़ कर थाने ले गया.

 

मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ रहा प्रशासन
30 जुलाई को सीतामढ़ी के नानपुर में कुछ महिलाओं को खुले में शौच करने के आरोप में पकड़ कर थाने लाया गया. दो-तीन घंटे सभी जमीन पर ही बैठी रहीं. महिलाएं शर्म के मारे साड़ी के पल्लू से मुंह ढंक कर बैठी थीं. सुबह का समय था. सभी भूखे-प्यासे थीं. इसी बीच एक महिला बेहोश हो गयी. थाने में अफरातफरी मच गयी. जानकारी मिलते ही ग्रामीण वहां जुट गये. डीएम साहेब को भी जानकारी दी गयी. आनन-फानन में उस महिला को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. प्रशासन के इस अमानवीय कार्रवाई के कारण पिछले कई दिनों से गरीब-मजदूरों व महिलाओं को शर्मसार होना पड़ रहा है.

मानवाधिकार का हनन
हाईकोटे के वकील दीनू कुमार कहते हैं कि प्रशासन का यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 (1) के खिलाफ है. आम आदमी व महिलाओं के आत्मसम्मान के साथ जीने के अधिकार का पूरी तरह हनन कर रहा है जिला प्रशासन. यह पूरी तरह गैरकानूनी कदम है. प्रशासन पहले यह बताए कि खुले में शौच करना किस तरह के अपराध की श्रेणी में आता है. वे कहते हैं ‘वेटेरन फोरम फॉर ट्रांसपरेंसी इन पब्लिक लाइफ’ की ओर से दायर पीआइएल के संदर्भ में हाइकोर्ट की टिप्पणी पर गौर करेंगे, तो सारी बातें समझ जायेंगे. लोयर कोर्ट में बाथरूम नहीं है. ज्यूडिशियल ऑफिसर के लिए बाथरूम नहीं है. जेल में महिला कैदियों के लिए, स्कूली छात्राओं के लिए बाथरूम नहीं है. पब्लिक प्लेस में मूत्रालय व शौचालय नहीं है. ऐसे में आप ओडीएफ के नाम पर आमलोगों को परेशान कर रहे हैं. यह क्या है? यह तो सरासर मनमानी है.

शौचालय नहीं बनवाया, तो राशन-पानी बंद कर देंगे

सीतामढ़ी जिले के डुमरा निवासी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता भिखारी शर्मा ने बताया कि सीतामढ़ी जिले के करीब 50 प्रतिशत ऐसे लाभुक हैं, जिन्होंने शौचालय तो बनवाया, लेकिन अभी तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिली. कम पढ़े-लिखे गरीब-मजदूरों को बिचौलिया ठग ले रहा है. उन्हें धमकाया जाता है कि शौचालय नहीं बनवाओगे, तो राशन-पानी बंद कर देंगे. 

शिवहर में दर्जनों शौचालय ध्वस्त

शिवहर के तरियानी प्रखंड में एक गांव है सुमहुति. इस गांव में बने अधिकतर शौचालय बेकार हो गये. सकुंती देवी कहती है कि छह-सात हजार में शौचालय बनवाया गया है. एक ही बारिश में शौचालय धंस गया. किसी का सीट धंस गया, तो किसी की दीवार गिर गयी. एक भी शौचालय काम का नहीं है. रंजू देवी कहती हैं कि दीवार का फाउंडेशन नहीं बनाया गया. जमीन के ऊपर से ही दीवार खड़ी कर दी गयी.बारिश में दीवार फट गयी.  जबकि सलेमपुर पंचायत के मुखियापति मनोज कुमार ने बताया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण हमारे यहां ओडीएफ का काम फिसड्डी चल रहा है. नवंबर-दिसंबर में जो शौचालय का काम कराया गया था, उसका पेमेंट अभी तक नहीं किया गया है. ईंट-भट्ठा, सीमेंट-बालू व गिट्टी उधार लेकर निर्माण कराया गया. ईंट-भट्ठा संचालक का करीब ढाई-तीन लाख रुपये बकाया है. बराबर तंग करता है पैसे के लिए. न भुगतान हो रहा है और न गरीबों के पास पैसे है देने के लिए. करीब 90 फीसदी लोगों के पास इतने पैसे नहीं है कि वे शौचालय बनवा सके. अब आप ही अनुमान लगा सकते हैं कि शिवहर में ओडीएफ का क्या हश्र है. 

 

इनपुट : अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

Facebook Comments

Appan Samachar Desk

Appan Samachar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *