रामलीला के लिए मशहूर है रामलीलागाछी

तुलसीदास, कबीरदास, विद्यापति, भिखारी ठाकुर सरीखे कवियों का दोहा–चौपाई व सवैया आज भी आमजन के दिलों–दिमाग में रचा–बसा है। तुलसीदास की रचना ‘रामचरितमानस’ के पदों को भजन–कीर्तन व अष्टयाम् में गाने की परंपरा गांवों में सालों से चलती आ रही है।

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सावन हे सखी सगरो सोहावन

पारू से खुशबू कुमारी || गांव के लोग प्रकृति के साथ जीते हैं। खेत-खलीहान, बाग-बगीचा, कीट-पतंग के सहचर हैं गांव के

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