ठोस कचरा प्रबंधन में राज्य में सबसे बेहतर मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर. सीएसइ (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट) ने हाल ही में ‘फोरम ऑफ सिटीज़ दैट सेग्रिगेशन’ का असेसमेंट रिपोर्ट 2017-2018 जारी किया है. 14 राज्यों के 20 शहरों में चल रहे ठोस कचरा निस्तारण के काम को आधार बनाकर तैयार किये गए असेसमेंट रिपोर्ट में बिहार के तीन शहरों पटना, गया व मुजफ्फरपुर का परफॉर्मेंस निराशाजनक है. हालांकि, इन तीन शहरों में सबसे अच्छी रैंकिंग मुजफ्फरपुर को मिली है. 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सबसे अधिक 81 अंकों के साथ इंदौर अव्वल है, जबकि पटना को सबसे कम 26 अंक मिले हैं. इसी तरह एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में 89 अंकों के साथ केरल का अलपुझा शहर सबसे आगे है, वहीं 44 अंकों के साथ मुजफ्फरपुर चौथे स्थान पर और 23 अंकों के साथ गया सबसे फिसड्डी रहा. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) रूल्स, 2016 को अमली जामा पहनाने में देश के जिन छह नगर निकाय सबसे आगे रहे, उसमें मुजफ्फरपुर भी शामिल रहा, जिसकी पिछले दिनों नयी दिल्ली में फोरम ऑफ सिटीज की बैठक में सराहना की गयी. कूड़ा उठाव, गीला व ठोस कचरे का निस्तारण, ट्रांसपोर्टेशन, विकेन्द्रीकृत प्रोसेसिंग, निबटान, बाय-लॉ को लागू करने को पारामीटर मानकर इन शहरों की रैंकिंग की गयी, जिसमें बड़े शहरों की तुलना में सबसे बेहतरीन काम सबसे छोटे (एक लाख से कम आबादी वाले) शहरों जैसे- महाराष्ट्र के वेंगुरला व पंचगणी का रहा है, जिसे क्रमशः फाइव व फोर लीव्स अवार्ड मिला. सबसे बड़े शहरों में इंदौर एवं मैसूर को ठोस कचरे के निस्तारण में उत्कृष्ट कार्य के लिए फोर लीव्स अवार्ड दिया गया.

आपको बता दें कि क़रीब डेढ़ साल पहले मुज़फ़्फ़रपुर नगर निगम, सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरॉन्मेंट और आईटीसी लिमिटेड मुज़फ़्फ़रपुर में स्वच्छता-स्वास्थ्य-समृद्धि कार्यक्रम को लागू करने के लिए एक साथ आए थे. तब से, 34 वार्डों में स्रोत पर ही पृथक्करण की शुरुआत हो चुकी है। साथ ही इन वार्डों ने विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को भी अपनाया। कचरा संग्राहकों को पृथक किए गए कचरों को संग्रहित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके साथ ही, परिवारों को घर पर ही गीले कचरों से कंपोस्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अक्टूबर 2018 तक मुज़फ़्फ़रपुर में पांच विकेंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि रौतिनिया डंप साइट में कचरे के निपटान को कम किया जा सके.

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एन्वायरॉन्मेंट (सीएसई) के उपनिदेशक चंद्र भूषण ने कहा, “मुज़फ़्फ़रपुर ने न सिर्फ़ प्रदेश के अंदर अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, बल्कि शहर में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर किए जा रहे कार्यों पर अच्छे अंक भी प्राप्त किए. हालांकि अभी भी बहुत काम करना बाक़ी है, जिससे कि मुज़फ़्फ़रपुर को देश के सर्वश्रेष्ठ शहरों में शामिल करवाया जा सके. हमारा लक्ष्य मुज़फ़्फ़रपुर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनाना है. यह तभी सम्भव है जब इसमें मुज़फ़्फ़रपुर के नागरिकों की सम्पूर्ण सहभागिता और स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नगर निगमों द्वारा सुदृढ़ कार्यवाही सुनिश्चित हो.” 

  • बिहार के’ शहरों की रैंकिंग में मुजफ्फरपुर की छलांग
  • 2017 के 9वीं रैंकिंग के मुक़ाबले 2018 में पाई चौथी रैंकिंग
  • स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के तहत बिहार के 32 शहरों में से मुज़फ़्फ़रपुर शहर ने हासिल की चौथी रैंकिंग
  • नागरिक प्रतिपुष्टि और प्रत्यक्ष अवलोकन—आकलन करने वालों ने शहर की सफ़ाई में अभूतपूर्व सुधार पाया और आधे से ज़्यादा नागरिकों ने शहर की सफ़ाई के बारे में सकारात्मक प्रतिपुष्टि/फ़ीडबैक दी
  • दिसम्बर 2016 में शुरू किए गए स्वच्छता स्वास्थ्य समृद्धि कार्यक्रम के तहत शहर के 34 वार्डों ने पहले से ही बेहतर पृथक्करण (सेग्रीगेशन) आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को अपना लिया था
  • मुज़फ़्फ़रपुर शहर अक्टूबर 2018 तक 100% विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन का लक्ष्य हासिल करने का प्रयास कर रहा है


    रिपोर्ट : अप्पन समाचार टीम

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