रामसर मॉडल से बचेगा सिकंदरपुर मन

मुजफ्फरपुर. मन का महत्व समझे बिना इसके पुनर्जीवन की बात बेमानी है. सिकंदरपुर मन मुजफ्फरपुर शहर का किडनी है. यह नैसर्गिक तोहफा है यहां की आबादी के लिए, जीव-जंतुओं के लिए, जलीय पौधों के लिए. यदि इसे बचाना है, तो रामसर मॉडल अपनाना होगा. ये बातें मालदीव नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ शहाब शब्बीर ने माड़ीपुर स्थित अपने मकान पर एक संक्षिप्त मुलाकात में कहीं. डॉ शब्बीर देश के दूसरे व बिहार के पहले रिसर्च स्कॉलर हैं, जिन्होंने वेटलैंड्स पर पीएचडी की उपाधि हासिल की है. अपनी पीएचडी की 600 पृष्ठ की थीसिस में इन्होंने करीब 70 पेज में सिकंदरपुर मन पर शोध सामग्री दी है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शोधार्थी रहे डॉ शहाब को अगस्त 2017 में पीएचडी की उपाधि मिली है. ”इंटरनेशनल लॉ रिलेटिंग टू वेटलैंड कंजर्वेशन एंड इट्स एनरॉलमेंट इन इंडिया सिन्स 1981” टॉपिक पर इन्होंने शोधकार्य पूरा किया है. अपने शोध निष्कर्ष के आधार पर इन्होंने जो सुझाव दिए हैं, वे इस प्रकार हैं- सिकंदरपुर मन को बचाने के लिए इसे एक संस्थागत रूप में लाना होगा. कड़े कानून बनाने होंगे. जनभागीदारी बनानी होगी. अवेयरनेस प्रोग्राम को बढ़ावा देना हाेगा. टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करना होगा. गाद हटना होगा. डंपिंग व अतिक्रमण को तत्काल रोकना होगा. कुल मिलाकर रामसर मॉडल अपनाना होगा.
 
स्पंज के रूप में काम करता है मन
‘मन’ वेटलैंड्स (नम भूमि या गीली जमीन) की श्रेणी में आता है, जो जैव विविधता व आजीविका की दृष्टि से जीव-जंतुओं व मानव प्राणियों के लिए महत्वपूर्ण है. वेटलैंड्स जीवन समर्थित प्रणालियां है, जो जलचक्र के कामकाज को व्यवस्थित करती हैं. वेटलैंड्स भूजल जलवाही का पुनर्भरण करने में मदद करते है. प्रदूषित जल को साफ करते हैं. तटरेखाओं की रक्षा करते हैं और बाढ़ की विभीषिका को कम करने के लिए स्‍पंज के रूप में कार्य करते हैं. मन, झील, धान के खेत वेटलैंड‍्स कहलाते हैं.


होती रहीं बैठकें, बनता रहा प्लान

2017 में इकोराइज कंपनी ने शहरी क्षेत्र के विकास के लिए जो एरिया बेस्ड डेवलमेंट प्लान बनाया है, उसमें सिकंदरपुर मन भी शामिल था. इसके सौंदर्यीकरण पर 250 से 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. योजना है कि यहां तीन छोटे-छोटे पार्क बनाये जायेंगे. फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, एमपी थियेटर व बोटिंग की सुविधा मुहैया करायी जायेगी. मेडिटेशन व योग के लिए योगा सेंटर खोला जायेगा. वहां बुद्ध व महावीर की आदमकद प्रतिमा भी स्थापित होगी. खुशबूदार पौधे लगाये जायेंगे. म्यूजिकल फाउंटेन का निर्माण होगा. इसके अलावा कई और प्रस्ताव शामिल थे. अब देखना है कि यह योजना कितने वर्षों में जमीन पर उतर पायेगी?
 इसके पहले भी जुलाई 2016 में प्रमंडलीय आयुक्त अतुल प्रसाद ने सिकंदरपुर मन के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए एक बैठक की थी, जिसमें उन्होंने अगले आदेश तक के लिए मन के आसपास की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी एवं अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसने की रणनीति बनायी थी, लेकिन आज भी अतिक्रमण जारी है. अप्रैल 2013 में तत्कालीन डीएम अनुपम कुमार ने सिकंदरपुर मन की जमीन की पैमाइश करते हुए 15 दिनों में इसके सीमांकन का आदेश दिया था. इसके अलावा अतिक्रमित भूमि को चिह्नित कर उसे अतिक्रमण मुक्त करने को भी कहा था.

स्मार्ट सिटी प्लान में सिकंदरपुर मन पर फोकस 
स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (एडीबी) एरिया के लिए चयनित 990 एकड़ जमीन का सबसे बड़ा भू-भाग सिकंदरपुर मन का है. मन इलाके को डेवलप करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने कई बार जमीन की मापी का निर्देश दिया है. उधर, एबीडी एरिया के विकास के लिए बनी कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए नगर निगम भी मापी का आदेश दे चुका है. इसके लिए एक टीम का गठन भी किया जा चुका है, लेकिन अतिक्रमणकारियों के भय के कारण टीम मापी करने से कतरा रही है.

करोड़ों की जमीन अपनी होगी, लोग ऐसी उम्मीद लगाए बैठे
सिकंदरपुर कुण्डल के प्रदीप सहनी मन के उत्तरी किनारे गुलमोहर के पेड़ की छांव में बैठे हैं. पास में ही प्लास्टिक का एक तंबू लगा है जिसमें भूसे का ढेर रखा है. बातचीत में प्रदीप बताते हैं कि यह मेरा भूसे का कारोबार है. इस मन से मेरे जैसे सैकड़ों लोगों का पेट चलता है.यदि इसका ठीक से देखरेख किया जाये और सुंदर बना दिया जाये, तो और लोगों का रोजी-रोटी चलेगा. मन का पानी पहले साफ था, लेकिन अब इतना गंदा हो गया है कि बदबू निकलता है. इसी मोहल्ले के राजा सहनी ने बताया कि ये जो सामने मकान-दूकान देख रहे हैं, यह दशरथ नाना का है. सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर दूकान बना लिए हैं. लेकिन कौन टोकेगा? अधिकारी सब को पैसा ले-देकर लोग अपना काम निकल ले रहा है. बाद में यही न होगा कि केस-मुक़दमा लड़ना होगा. बरसों के चलेगा, तबतक तो अपना धंधा-पानी चलता रहेगा. यदि एक दिन जमीन हो गयी, तो करोड़ों की होगी. केस-मुक़दमा का सारा पैसा निकल जायेगा. जोगिया मठ की ओर इशारा करते हुए राजा कहता है, वो देखिये. ये सारे मकान अतिक्रमण करके ही बनाया गया है.

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