गायत्री सुब्रान बनीं पहली भारतीय दलित महिला पायलट

देशभर में लगातार हो रहे दलित अत्याचार की दुखद घटनाओं के बीच एक सुकून देनेवाली खबर मिली. एक दलित लड़की ने बचपन में देखे अपने सपने को 20 की उम्र में ही पूरा कर लिया, तो यह मिथक एक बार फिर टूटा कि दलितों में प्रतिभा की कमी होती है. केरल की रहनेवाली गायत्री सुब्रान ने हवाई जहाज उड़ा कर यह साबित कर दिया कि माकूल अवसर और सही शिक्षा मिले, तो गरीबी व जाति का दंश भी बाधा नहीं बनती है. गायत्री को भारत की पहली महिला पायलट बनाने का सौभाग्य मिला.

गायत्री उत्तर प्रदेश के राय बरेली में एविएशन एकेडमी से जुड़कर कोर्स पूरा किया. प्रशिक्षण के दौरान ही उसने 70 घंटे की उड़ान भरी, जिसमें 20 मिनट तक 1500 फ़ीट की ऊंचाई पर हवाई जहाज उड़ाया. थ्योरी क्लास ख़त्म होने के बाद वह लाइसेंस लेने और उड़ान भरने के प्रयास में जुट गयीं. अंततः उसे अपने मकसद में कामयाबी मिली. उसे कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस भी मिल गया.

पप्पानायिल सुब्रान और शकुंतला की यह लाडली बेटी बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना देखा करती थी. गायत्री ने न जाने कितनी ही रातें फुस की अपनी झोपड़ी के ऊपर से उड़ते हवाई जहाज की जलती बत्ती को देख कर गुजारी होंगी. आज उसके माता-पिता खुश हैं बेटी के सपने को साकार होने पर. गायत्री के पिता केरल स्टेट फाइनेंस इंटरप्राइजेज में एजेंट का काम करते हैं. एक छोटे से घर में रह कर मुफलिसी की जिंदगी जीते हुए एक दलित लड़की के लिए आसमान इतने बड़े सपने को पूरा करना आसान नहीं था. माता-पिता का हर कदम पर साथ मिला. प्लस टू करने के बाद स्पोकन इंग्लिश की तैयारी के लिए भेजने से लेकर पायलट बनने तक पूरे परिवार ने उसे उत्साहित करता रहा. गायत्री की पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़ा. कोर्स पूरा होने तक करीब 60 लाख रुपए खर्च हुए.

-अप्पन समाचार डेस्क

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