ऑटो चालक की बेटी प्रियंका कुशवाहा को फिल्मों में गाने का मिला ब्रेक

बिहार के गोपालगंज जिले के धोबवल पटखौली गांव में अतिसाधारण परिवार में जन्मी प्रियंका कुशवाहा बचपन से ही मेधावी छात्रा थी. उसकी सुरीली आवाज सुनकर शिक्षक, सहपाठी सबके सब प्रभावित रहते थे. कम उम्र में ही प्रियंका गायकी, खेलकूद, नाटक आदि में भाग लेने लगी थी. जो भी उसकी आवाज सुनता, कहता, प्रियंका तुम गाओ. तुम्हारी आवाज हजारों-लाखों में एक है. इस तरह गायकी की उड़ान भरने के सपने उसकी आंखों में सजने लगे. लेकिन हारमोनियम खरीदने तक के पैसे नहीं थे. ऑटोरिक्शा चालक पिता से जब उसने कहा कि मैं सिंगर बनना चाहती हूं, तो पिता को सुनकर बहुत प्यार आया, पर गांव के सीधे-सादे इस व्यक्ति ने कहा, ‘बेटी हमलोग ऐसे ही सपने देखे, जो पूरा कर सके. तुम्हारा यह सपना पूरा करना हम जैसे लोगों के वश की बात नहीं. ये राजा-महाराज के सपने हैं. बड़े पैसेवाले के सपने हैं.’ यह कहते-कहते प्रियंका के पिता की आंखों में आंसू थे. बेटी भी कुछ दिनों तक परिवार की मजबूरी समझ कर चुप रही. उसकी मां मीना देवी को भी बचपन से ही गाने और डांस का शौक था. वह बहुत हिम्मत वाली महिला है. उन्होंने बेटी को हिम्मत दी और उसे साथ देने लगी. पर पैसे की बात आयी, तो वहां कोई रास्ता नहीं नजर आ रहा था. अंतत: प्रियंका ने माता का जागरण करना शुरू किया. उसकी आवाज का जादू श्रोताओं के मन-मस्तिष्क को झकझोर कर रख देता था. और इस तरह देवी मां की कृपा भी बरसने लगी. उसकी आवाज व गायिकी से प्रसन्न होकर लोग ईनामस्वरूप इतने पैसे बरसाये कि प्रियंका का हारमोनियम खरीदने का सपना पूरा हो गया. हारमोनियम पाकर लगा जैसे सारे जहां की खुशियां एक साथ घर में आ गयी हाें. इसके बाद उसने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेनी भी शुरू कर दी. 60 किलोमीटर दूर संगीत सीखने जाने लगी. गुरु भी कोमल हृदय के मिले. संगीत गुरु कृष्ण कुमार कुञ्ज, मनोज मौर्या व विजय सिंह ने प्रियंका में शास्त्रीय संगीत का संस्कार डाला. प्रियंका गुरु के सानिध्य में रहकर संगीत साधना करने लगी.सब कुछ ठीक चल रहा था. लेकिन इसी बीच प्रियंका के जीवन में ट्रेजडी आती है. अचानक 24 दिसंबर 2016 को उसके पिताजी का ब्रेन हेमरेज से मौत हो गयी. लगा जैसे साडी दुनिया उससे रूठ गयी. जीवन में अँधेरा छा गया. समय के साथ उसने खुद को संभाला और अपने सफर को जारी रखा.

प्रियंका के पिताजी रामप्रीत भगत मुंबई में रहकर ऑटोचालक चलाते थे. वह छुट्टी के दिनों में अपनी बेटी को मुंबई ले जाते थे. वहां जाकर प्रियंका को लगा, यहां से उसके सपने उड़ान भर सकते हैं. मुंबई में उसके पापा साप्ताहिक भजन कार्यक्रम में जाया करते थे. मंदिर के कीर्तन मंडली में एक दिन चर्चा चली कि उनकी बेटी भी गाती है. यह सुनकर मंडली के कलाकारों ने उन्हें बेटी को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया. एक दिन विज्ञापन देखकर नालासोपारा में संगीत क्लास को ज्वाइन किया. मनोज मौर्या जो खुद गायक बनने मुंबई आये थे, ने भी उसे संगीत की शिक्षा देने लगे. पिया वसंती फेम गीतकार-संगीतकार राकेश निराला ने प्रियंका को एक भोजपुरी फिल्म में भरत शर्मा के साथ होली गीत की रेकॉर्डिंग में गाने का चांस दिया. लेकिन किसी कारणवश उसके हाथ से यह मौका निकल गया.फिर भी वह निराश नहीं हुईं, क्योंकि भरत शर्मा उसकी आवाज के कायल हो गये.

प्रियंका की पढ़ाई गांव में ही चल रही थी. सो वह गांव वापस आ गयी. उसने गुरु मनोज मौर्या के बक्सर में ‘जरा-जरा तुमसे है कहना’ के प्रमोशन शो में भाग लिया और वहां लता जी का एक गीत गाया. उसने ‘बेला महका रे महका आधी रात को’ और ‘दिल ने तुझे बिठाके’ गाया. लोगों ने वन मोर वन मोर की झड़ी लगा दी. प्रियंका को कई बार ये गीत गाने पड़े. ‘जरा-जरा तुमसे है कहना’ के गीतकार-संगीतकार राकेश निराला ने वहीं इस आवाज को प्रमोट करने का मन बना लिया. गांव से मुंबई लौट कर हिंदी फिल्म में चांस देने की घोषणा कर दी. कुछ दिनों तक उनके सानिघ्य में रहकर प्रियंका ने फिल्म गायिकी की बारिकियां सीखनी शुरू कीं. उन्होंने लगातार कई फिल्मों में गवाया. रैकेट, पंखुड़ी, तर्पण, दौड़ो विकास के लिए (बिहार मैराथन एंथम), पिया जी का आवन लागे रे (होली 2018) में प्रियंका ने अपनी सुरमई आवाज से गीतों के गुलदस्ते को सजाया. फिल्म संगीत की दुनिया में कदम रखने के बाद उसे अपने प्रतिभा निखारने का अवसर मिला. उसकी दीवानगी ने उसे विदेश भ्रमण का रास्ता प्रशस्त किया. पिछले दिनों वह युगांडा से होकर लौटी हैं. युगांडा के ईस्ट इंडिया कल्चर एसोसिएशन ने प्रियंका को होली पर आधारित संगीत कार्यक्रम में आमंत्रित कर पुरस्कृत किया है.

– अप्पन समाचार डेस्क

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