50 आइआइटीयन ने नौकरी छोड़ बनायी अपनी राजनीतिक पार्टी

मुजफ्फरपुर. सीतामढ़ी के विद्रोही नवीन, सरकार अखिलेश, मुजफ्फरपुर के विक्रांत वत्सल व सासाराम के सिंह अजीत कुमार को देखकर आपको नहीं लगेगा कि ये लड़के राजनीतिक अखाड़ों के धुरंधर खिलाड़ी हैं. सामान्य कद-काठी के ये युवा स्टूडेंट या फिर प्रोफेशनल्स जैसा दिखता है. टोपी व खादी का कुर्ता-पायजामा पहने परंपरागत नेताजी की तरह न इनका पहनावा है और न इनके पास झूठे वादों का पिटारा. इन युवातुर्क के मन में एक मजबूत संकल्प है कि राजनीितक संघर्ष के जरिये सालों से नेताओं द्वारा ठगे गये एससी-एसटी, ओबीसी, महिला व अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई लड़ना, उनके बीच से नेतृत्व पैदा करना और ताकतवर समाज-समूह की ओर से वंचित तबकों के खिलाफ रची जा रही साजिश-षड‍्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए उन्हें जागरूक करना है.

विद्रोही नवीन, संपथ कुमार बनोथ एवं विक्रांत वत्सल

बिहार के इन तीनों युवाओं को आइआइटी की पढ़ाई के दौरान पिछड़े समाज से हाने के कारण मिले खट्टे-मीठे अनुभव ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी. तभी इन युवाओं ने ठान लिया था कि अपनी सुख-सुविधा त्यागकर समाज के लिए काम करूंगा, तािक दूसरे एससी-एसटी व ओबीसी छात्रों को हमलोग जैसा अपमान व संघर्ष न करना पड़े. इसके बाद सबने अपनी-अपनी नौकरी छोड़ कर बिहार चले आये और राजनीितक पार्टी ‘बहुजन आजाद पार्टी’ का गठन किया. इस अभियान से आईआईटी के और भी छात्रों का साथ मिला. देखते-देखते 50 पूर्व छात्रों का एक समूह बन गया, जो एससी, एसटी व ओबीसी के हक-हुकूक की लड़ाई को धार देने के लिए अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और बहुजन आजाद पार्टी का सिपाही बन गया.

इस पॉलिटिकल ग्रुप का नेतृत्व कर रहे आईआईटी दिल्ली से साल 2015 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके नवीन कुमार उर्फ विद्रोही नवीन ने बताया कि हम 50 लोगों का एक समूह है. सभी सदस्य देश की अलग-अलग आईआईटी से हैं, जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने के लिए अपनी नौकरियां छोड़ी हैं. हमने पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए चुनाव आयोग में अर्जी डाली है और इस बीच जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं. नवीन ने कहा कि उनका मकसद 2019 के लोकसभा चुनाव लड़ना नहीं है. हम जल्दबाजी में कोई काम नहीं करना चाहते हैं. इसलिए हम 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से अपनी चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे और फिर अगले लोकसभा चुनाव का लक्ष्य तय करेंगे.

आइआइटीयन विक्रांत वत्सल ने बताया कि जनसंख्या के हिसाब से हर क्षेत्र में सभी तबकों को प्रतिनिधित्व मिले, इसकी लड़ाई हमारी पार्टी के एजेंडे में प्रमुख रूप से है. हम महिलाओं व अल्पसंख्यक समुदाय की उचित राजनीतिक, शैक्षणिक भागीदारी की वकालत करते हैं. तेलंगाना के संपथ कुमार बनोथ एसटी श्रेणी से आते हैं. श्री बनोथ भी वंचित वर्ग की आवाज बनने के लिए परंपरागत नहीं, बल्कि नयी सोच व नये तरीके की राजनीति करने के पक्षधर हैं.

इस नयी पार्टी में मुख्यत: एससी, एसटी व ओबीसी जाति के सदस्य हैं. अमूमन सभी सदस्यों का कहना है कि पिछड़े वर्गों को शिक्षा और रोजगार के मामले में उनका उचित हक नहीं मिला है. पार्टी ने संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर, सुभाषचंद्र बोस और एपीजे अब्दुल कलाम सहित कई दिग्गज नेताओं की तस्वीरें लगाकर सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू कर दिया है. 14 अप्रैल को गांव-गांव में आंबेडकर जयंती मना कर अपनी गतिवििधयों को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. बिहार के सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर व मोतिहारी में अभी सघन रूप से जनसंपर्क अिभयान चलाया जा रहा है.

– अप्पन समाचार डेस्क

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