खामोश जुलूस से उठी बुलंद आवाज, तीन तलाक बिल वापस लो

मुजफ्फरपुर. यह शायद पहली बार है कि इतनी संख्या में बुर्का पहने भारतीय मुस्लिम महिलाएं हाथ में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर उतरी हैं. तीन तलाक बिल के विरोध में बुधवार को डेढ़ सौ से अधिक शहरों में हज़ारों मुस्लिम महिलाएं अपने घर की दहलीज से निकल कर दिल्ली के तख्तो-ताज तक अपनी मुखर आवाज पहुंचाईं. बिहार के मुजफ्फरपुर सहित अन्य जिलों में भी खामोश जुलूस निकाला गया.

ये महिलाएं लोकसभा में पारित और राजयसभा में लंबित इस बिल को वापस लेने की मांग कर रही थीं. इशरत हसन, नसीम तबस्सुम, तलत परवीण जेबा, सरवत जबी, इशरत जबीन, कुदसिया परवीन, रिजवाना एकबाल, नरगिस खातून, मुमताब बेगम ने एक स्वर में कहा कि तीन तलाक बिल में खामियां हैं. हमलोग इस बिल का विरोध करता है. यदि कानून बन गया, तो उनके पति को तीन साल की जेल होगी और हमारे लिए बच्चों और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जायेगा. हमारे लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ ही ठीक है. हम शरीया के साथ हैं.

सनद रहे कि बीते साल अगस्त महीने में उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक़ को असंवैधानिक करार दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक लाई. यह बिल लोकसभा में पारित हो गया. राज्यसभा से अब तक लंबित है.

बीबीसी वेबसाइट के मुताबिक, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक के विरोध में पूरे देश के 180 शहरों में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसी तरह से खामोश जूलुस निकाला है. पिछले दो महीने से इस संगठन से जुड़ी मुस्लिम महिलाएं इस बिल का विरोध सड़कों पर उतर कर इसी अंदाज में कर रही हैं. दिल्ली उनका आखिरी पड़ाव था.

रिंकू कुमारी की रिपोर्ट

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