मंदिर जाना छोड़ स्कूल-कॉलेज जाएं, तभी होगी असली क्रांति 

”आपके पास जो पेन है, बाबा साहेब की देन है.” 
मुजफ्फरपुर. यह नारा जितनी बार गूंज रहा था, बसौली स्कूल के अहाते में जुटे बहुजन समाज के युवाओं के चेहरे उतनी-ही बार संघर्ष की आभा से चमक उठता था.  रविवार की सुबह करीब 8.00 बजे होंगे. दलित-पिछड़े समाज के करीब 150 लोगों के बीच गहमागहमी थी. एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने और आरक्षण को ख़त्म करने की देशभर में चल रही साजिश के खिलाफ लोग एकजुट होकर गंभीर विमर्श में डूबे थे.
भारत बंद पर विचार हो रहा था. बारी-बारी से वक्ता मौजूद लोगों में जोश भर रहे थे. मुकेश पासवान फरमाते हैं कि जिस बाबा साहेब ने हमें कलम थमाई थी, उस पर कोई आंच आयेगी, तो हम उसी कलम को हथियार बनाकर लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे.
बात को आगे बढ़ाते हुए अनिल चौधरी कहते हैं कि राजपूत बिरादरी आंदोलन के बल पर ‘पद्मवती’ को ‘पद्मावत’ करवा सकते हैं, तो हम क्यों नहीं अपने अधिकार को लड़ कर हासिल कर सकते हैं. हम संख्या बल में उससे 10-12 गुना अधिक हैं. सवर्ण कहता है आरक्षण देना बंद करो, तो मैं भी कहता हूं बंद करो. लेकिन जिस तरह हमारा पुरखा मैला ढोया, उसी प्रकार तुम भी ढोओ, जिस तरह हमारा पुरखा जानवरों का चमड़ा छीला, उसी तरह तुम भी छीलो, जिस तरह हमारा पुरखा तुम्हारे घर की चौकीदारी की, तुम भी चौकीदारी करो, जिस तरह हमारे घर की औरतें तुम्हारे घर में चूल्हा-चौका किया, उसी तरह तुम्हारे घर की औरतें भी करें. जिस तरह से हमारे लोग शहर की नालियां साफ करते हैं, तुम भी सवर्ण जातियां नाला साफ करो. हमारे लोग जूते पॉलिश करते हैं, सिलाई करते हैं, तुम भी करो. हमारे बच्चे कठिनाइयों के बीच सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, तुम भी अपनी संतान को इसी व्यवस्था में पढ़ाओ. फिर बात आरक्षण ख़त्म करने की करना. तालियों के बीच अनिल चौधरी जोड़ते हैं कि हमें आबादी के हिसाब से नौकरियां चाहिए, जमीन-जायदाद चाहिए, सारी व्यवस्थाओं में हिस्सेदारी चाहिए.
इस बीच मुखिया पति बसंत मांझी को जैसे ही मौका मिला, उन्होंने जोशीले भाषण से उत्साह बढ़ायी. कहा, हमारे शरीर के खून का बूंद-बूंद दलित, महादलित व पिछड़ी जातियों के आंदोलन को समर्पित है. हमने सवर्ण जातियों से जितनी प्रताड़ना झेली, उसे अगली पीढ़ी को झेलने नहीं देंगे. सबको जागरूक करेंगे.
गंभीर मुद्रा में बैठे चंदन चौधरी का उद्गार इस रूप में व्यक्त होता है. “लड़ाई बहुत लंबी है. इसलिए ऐसे एकजुटता के साथ लड़ना होगा. हमें बांटने का भी प्रयास किया जायेगा, लेकिन हमसब को उनकी चालाकियों से सावधान रहना होगा. धर्म व मजहब के नाम पर समाज को बंटने नहीं देना है”
“मनुवादियों ने महिलाओं को भी मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखा था. सबसे पहले महिलाओं को इस गुलामी से हमें मुक्त करना होगा, तभी हम इस लड़ाई को जीत सकते हैं.” पप्पू यादव की बातों का जनसमूह ने तालियों से समर्थन किया.
अब तक स्कूल का कैंपस साईकिल व मोटरसाइकिल से पट चुका था. कई पंचायतों व जिला मुख्यालय से लोगों के आने का सिलसिला जारी रहा. पढ़े-लिखे व नौकरी-पेशा दलित युवकों की अच्छी-खासी संख्या जुटी थी. इस बीच बसौली पंचायत के मुखिया पति शंकर कुशवाहा बोल उठे, “स्टेप बाई स्टेप आरक्षण को ख़त्म किया जा रहा है. इसलिए हम सबको उठ खड़ा होना होगा. यह गांठ बांध लें कि पहली पीढ़ी गोली खायेगी, दूसरी पीढ़ी जेल जायेगी और तीसरी पीढ़ी शासन करेगी.
भीम सेना के जिला प्रभारी संतोष आंबेडकर ने सरकार की साजिश के खिलाफ लड़ाई का शंखनाद किया. कई वक्ताओं ने कहा कि अब दलित-पिछड़े समाज के एक-एक बच्चे को शिक्षित होना होगा, चाहे आधे पेट खाकर ही क्यों न पढ़ना हो, जरूर पढ़ेंगे. हमें शिक्षा को हथियार बनाना होगा. बाबा साहेब कहते थे मंदिर जानेवाली पिछड़े समाज की भीड़ स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों की ओर जाने लगेगी, धार्मिक कर्मकांडों व पूजा-पाठों को छोड़ हमारे घर की महिलाएं सावित्री बाई फूले, बाबा साहेब, जगदेव बाबू के सिद्धांतों पर चलेंगी, तब हमारा समाज जागरूक होगा. यहीं से असली क्रांति की शुरुआत होगी.
कमल कुमार कहते हैं कि नौजवान तो मनुवादियों के तमाम षड्यंत्रों को समझते हैं, लेकिन महिलाएं पाप-पुण्य, शाप-वरदान व चमत्कार के कुचक्र में पड़ी रहती हैं, इस कुचक्र से महिलाओं को दूर करना हमारी जवाबदेही है. उन्हें भी शिक्षित करना होगा, तभी अछूत-सछूतों में बदलाव आ सकता है.
अप्पन समाचार डेस्क

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