18.70 लाख का पॉली हाउस, बर्बाद हो रही शिमला मिर्च की फसल

मुजफ्फरपुर. बागवानी विभाग ने एक पॉली हाउस के निर्माण में 18.70 लाख रुपये बहा दिये. लेकिन, इसके अंदर लगी शिमला मिर्च की फसल बर्बाद हो रही है. मौसम के विपरीत खेती से लाभ की उम्मीद लगा कर बैठे किसान को भारी नुकसान हो रहा है. तापमान नियंत्रण नहीं होने व ऊमस ज्यादा होने के कारण पौधों की जड़ में कई तरह के कीड़ों का प्रकोप हो गया है. इससे फसल उत्पादन उम्मीद के अनुसार नहीं हो रहा है. विभाग का खर्च सफल नहीं हो रहा है. इसके निर्माण में मापदंड को लेकर वैज्ञानिक व उद्यान विभाग के अधिकारी की अलग-अलग राय हैं. इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
कुढ़नी प्रखंड के करमचंद बलड़ा गांव के कमलपुरा टोले में आजाद जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ के लिए पॉली हाउस का निर्माण किया गया. वर्ष 2015-16 में बिहार राज्य बागवानी मिशन की ओर से नेचुरल वेटीलेशन पॉलीहाउस योजना से काम हुआ था. 2000 मीटर स्क्वायर में 18.70 लाख रुपये की लागत से इसे तैयार किया गया. इस पर 50 फीसदी अनुदान यानी 9.35 लाख रुपये अनुदान मिले. इसका निर्माण का एग्री प्लास्ट प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन प्राइवेट लिमिटेड ने करवाया था. लेकिन पॉली हाउस में उतनी व्यवस्था नहीं है, ताकि फसल सुरक्षित रह सके. हालांकि, बागवानी मिशन के अधिकारी इसके गुणवत्तापूर्ण होने का दावा कर रहे हैं.

इस समूह से जुड़े पिंकू बैठा व ललन सहनी बताते हैं कि खेती के लिए पॉली हाउस के निर्माण के लिए 18,000 हजार रुपये सालाना की दर से 15 वर्ष के एग्रीमेंट पर जमीन ली गयी. 1.25 लाख रुपये समूह से खर्च कर सबमर्सिबल बोरिंग समेत कई चीजें लगायी गयी. फिर, 14,000 रुपये बिचड़े पर खर्च कर 4700 शिमला मिर्च के पौधे लगाये गये हैं. सोचा था इसमें अच्छी फसल होगी. लेकिन, मायूसी हाथ लगी. इसमें लगे पौधे काफी संख्या में सूख रहे हैं. बाहर के तापमान से ज्यादा अंदर का तापमान रहता है. ऊमस तो और अधिक रहता है. धूप निकलने के बाद अंदर टिकना मुश्किल होता है. काफी प्रयास के बाद आठ क्विंटल शिमला मिर्च निकला है. इसकी कीमत 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिली है. इसकी विशेषताओं की चर्चा सुन रहे थे, वैसा इसके अंदर में कुछ नहीं पता चलता है. शिमला मिर्च का आकार सुडौल नहीं हो रहा है. पौधे के जड़ को कीड़े काट रहे हैं. लगता है इसके अंदर ऊमस के कारण कीड़े का प्रकोप बढ़ रहा है. जो काफी चिंता की बात है.

कृषि वैज्ञानिक बोले
सरैया केवीके में कृषि वैज्ञानिक हेमचंद्र चौधरी ने कहा कि पॉली हाउस में बाहर के तापमान का कोई खास फर्क नहीं पड़ता. इसके अंदर तापमान नियंत्रित करने के लिए ग्रीन मैट, तापमान व आर्द्रता नियंत्रण के लिए मिक्स चैंबर, तापमान मापक यंत्र, अंदर की गैस को बाहर निकलने के लिए वेंडिलेटर की व्यवस्था होनी चाहिए. ताकि ऑफ सीजन में शिमला मिर्च, जरबेरा फूल, हाइब्रिड टमाटर, खीरा जैसी फसलों से अच्छी आमदनी कर किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें. अगर, किसी पॉली हाउस में इतनी व्यवस्था नहीं है, तो इसमें बाहर के तापमान से अंदर का तापमान ज्यादा हो जायेगा. जो फसल के हानिकारक है.

अधिकारी बोले
मुजफ्फरपुर के सहायक उद्यान निदेशक राधेश्याम ने बताया कि 2000 स्क्वायर मीटर की पॉली हाउस में 18.70 लाख रुपये की लागत आती है. इसमें बागवानी मिशन की ओर से 50 फीसदी अनुदान (9.35 लाख रुपये) दिया जाता है. इस लागत से पॉली हाउस का ढांचा, स्प्रिंकलर व ड्रीप सिंचाई की व्यवस्था करनी है. जहां तक तापमान के नियंत्रण का सवाल है, तो स्प्रिंकलर सिस्टम पौधों को पानी देकर तापमान को नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है. इसमें किसान को खुद सबमर्सिबल बोरिंग लगाना है. और सभी व्यवस्था किसानों को खुद ही करनी होती है.

(इनपुट : प्रेम)

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