किसान महारैली के जरिये छेड़ी जायेगी आरपार की लड़ाई : अन्ना हजारे

खगड़िया. भ्रष्टाचार के दलदल में फंसकर देश कराह रहा है. अन्नदाता भूखे मर रहे हैं और सरकार उद्योगपतियों की चिंता करने में लगी है. 22 साल में अबतक 12 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली. किसानों की हालत नाज करे बंदर और मौज करे मदारी वाली हो गयी है. आज हमारे देश में सत्ता से पैसे का और फिर पैसे से सत्ता का खेल चल रहा है. यह सब लोकतंत्र के लिए घातक है. ये बातें प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने खगड़िया में एक कार्यक्रम के दौरान कहीं.

उन्होंने कहा कि निराश किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. ऐसी हालत में देश में किसान पेंशन बिल लागू कर 60 साल से अधिक उम्र के हर किसान को 6000 मासिक देने, कृषि मूल्य आयोग को सरकारी नियंत्रण से बाहर करने, फसल बीमा योजना में सुधार करने व स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को शीघ्र लागू करने की जरूरत है. अन्ना ने कहा कि एक तो बैंक किसानों को लोन नहीं दे रहा है. यदि दे भी रहा है तो उसका चक्रवृद्धि ब्याज वसूल रहा है, जबकि 1949 बैंक रेगुलेटिंग एक्ट में यह जिक्र है कि किसी भी हालत में चक्रवृद्धि ब्याज नहीं लेना है. उन्होंने कहा कि खगड़िया आकर पता चला कि यहां मक्के की फसल में दाना नहीं आया है.

किसान विकास मंच की ओर से आहूत किसान सभा को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि मैं फकीर आदमी हूं, लेकिन अब तक दो भ्रष्ट सरकारों को गिरा चुका हूं. यहां मैं न चुनाव लड़ने आया हूं और न आपलोगों से वोट मांगने. महात्मा गांधी से प्रेरित होकर मैंने समाज सेवा का व्रत लिया था. तब से जनता की सेवा कर रहा हूं और जीवन भर करता रहूंगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि 23 मार्च को दिल्ली में प्रस्तावित किसान महारैली में जरूर शामिल हों. इस रैली के जरिये सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई छेड़ी जाएगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Skip to toolbar