यह ट्रेन की बोगी नहीं, सरकारी विद्यालय है जी

बिहार के सरकारी विद्यालयों का नाम जब भी आता है तो अमूमन हमारे मन में एक ऐसे भवन का चित्र उभरता है, जो जर्जर होता है और जहां की पढ़ाई गुणवत्तापूर्ण नहीं होती है. लेकिन जब आप समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीनगर स्थित एक सरकारी स्कूल में जायेंगे, तो आपकी सोच बदल जाएगी. “राजकीयकृत मध्य विद्यालय नन्दनी” के प्रांगण में जाते ही एक सुखद एहसास होता है. ‘वाह ! क्या ख़ूबसूरत जगह है. क्या यह सरकारी विद्यालय है?’ ऐसे शब्द आपके मुख से निकल ही जायेंगे.

इस विद्यालय की व्यवस्था के सामने प्राइवेट स्कूल भी फेल है. फूलों की क्यारियां, रंगीन दीवारें, बेंच-डेस्क व बल्ब-पंखे से सुसज्जित कमरे, साफ-सुथरे चार शौचालय, चार चापाकल, एमडीएम बनाने के लिए किचेन, लडके-लड़कियों के खाने के लिए होटल की तरह दो अलग-अलग कमरे, पुस्तकालय, लैब आदि इस विद्यालय की खूबसूरती को बढ़ा देता है. बच्चों को शुद्ध पेयजल मिले, इसके लिए प्राचार्य ने निजी फंड से एक आरओ और मोटरपंप लगवाया है. बच्चों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने के लिए तीन वर्ग कक्ष को ट्रेन के डब्बे का शक्ल दिया गया है. इसकी लंबाई 60 फ़ीट है. ये कमरे अन्य कमरों की तरह ही हैं. सिर्फ इसकी अगली दीवार को पेंटिंग करके ट्रेन की बोगी का लुक दिया गया है, जो बच्चों को खूब लुभा रहा है. जिसका नाम रखा गया है, ”शिक्षा एक्सप्रेस”. इस विद्यालय में दो दर्जन से अधिक कमरे हैं. 

विद्यालय में करीब 750 छात्र-छात्राएं हैं, जिनमें 400 सिर्फ लड़कियां हैं. वर्ग एक से आठ तक की पढ़ाई यहां होती हैं. कुल 14 शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, जिनमें नौ महिला शिक्षक हैं. विद्यालय के प्राचार्य रामप्रवेश ठाकुर कहते हैं कि हमारे स्कूल में शिक्षकों की कमी नहीं हैं. सभी शिक्षक टीम भावना के साथ काम करते हैं इसलिए यह विद्यालय आदर्श बन सका है. “बाल संसद” की भी भूमिका प्रशंसनीय है. साफ़-सफाई से लेकर अन्य व्यवस्था में भी बाल संसद अहम रोल निभाता है. प्राचार्य बताते हैं कि हम विद्यालय की खूबसूरती के साथ-साथ बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण पर भी पूरा ध्यान देते हैं.

किताबी ज्ञान के अलावा अनुशासन, संस्कार, चरित्र निर्माण आदि पर भी हमारा जोड़ रहता है. नियमित ‘चेतना सत्र’ चलता है, जिसमें गुरुवंदना, बिहार गीत, अभियान गीत, संविधान का पाठ, प्रेरक प्रसंग, समाचार वाचन शामिल हैं. समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए बच्चों की प्रतिभाओं को हम उभारने का प्रयास करते हैं. वे कहते हैं कि हमारे पास सिर्फ एक कंप्यूटर है, जिसे मुखिया जी ने डोनेट किया था. इसपर सिर्फ कार्यालय संबंधी कार्य निबटाये जाते हैं. हमारी अगली योजना है कि स्कूल में 5-10 कंप्यूटर हो, ताकि बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा दी जा सके. पिछले तीन साल से इस विद्यालय को एमडीएम के बेहतर संचालन के लिए जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ स्कूल का अवार्ड मिल रहा है. स्वच्छता पुरस्कार के लिए भी विद्यालय का चयन किया गया है.

– अप्पन समाचार डेस्क

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