सभी शिक्षकों को मिले समान वेतन : सुप्रीम कोर्ट

पटना। राज्य के करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों के चहरे पर उस समय ख़ुशी तैर गयी, जब सुप्रीम कोर्ट ने समान काम के बदले समान वेतन से जुड़े मामले की सोमवार को पहली सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए यह भी कहा है कि जब अापने नियोजित शिक्षकों को पढ़ाने के लिए रखा, तब उनकी योग्यता पर क्यों नहीं आपत्ति जताई? लेकिन जब समान काम के बदले समान वेतन देने की बात आई, तो आपने उनकी क्वालिफिकेशन पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, जबकि उन्हीं नियोजित शिक्षकों से पढ़कर कितने ही छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया. इस कमेटी को चार हफ्ते में नियोजित शिक्षकों पर खर्च की जानेवाली वाली राशि के साथ ही समान वेतन देने पर पड़ने वाले भार और पूर्व में खर्च की जा रही राशि की विस्तृत रिपोर्ट देनी है.

अब अगली सुनवाई 15 मार्च को
उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ ने करीब एक घंटे तक बहस के दौरान केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसीटर जनरल को भी निर्देश दिया है कि सर्वशिक्षा अभियान मद में केंद्र सरकार 60 फीसदी राशि देती है. ऐसे में कितनी राशि खर्च होती है, उसका ब्योरा दें. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति अलग नियमावली पर हुई थी और इनकी शैक्षणिक योग्यता भी कम रखी गयी थी. इस पर कोर्ट ने कहा जो शिक्षक पिछले 10 सालों से काम कर रहे हैं, उनकी योग्यता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. वहीं, शिक्षकों की ओर से अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में 23 प्रतिशत तक राशि खर्च करती थी, लेकिन अब 15 फीसदी तक ही राशि खर्च कर रही है. इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल व न्यायाधीश यूयू ललित की बेंच ने मामले की सुनवाई की है. अब अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी.

सरकार पर पड़ेगा 15 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ
यदि पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट हू-ब-हू लागू करता है तो राज्य सरकार पर 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. वर्तमान में नियोजित शिक्षकों के वेतन मद में 10 हजार करोड़ रुपये सालाना सरकार खर्च करती है. फिलहाल नियोजित शिक्षकों को अधिकतम 25 हजार वेतन मिलता है, लेकिन पुराना वेतनमान लागू होने से शिक्षकों को 40 से हजार से ज्यादा वेतन हर महीने मिलेगा.

कल्याणकारी राज्य नहीं कर सकती है भेदभाव
अक्टूबर, 2016 में न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने अपने एक फैसले में कहा था कि ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ की परिकल्पना संविधान केविभिन्न प्रावधानों को परीक्षण करने केबाद आई है. पीठ ने कहा था कि अगर कोई कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों के समान काम या जिम्मेदारी निभाता है, तो उसे दूसरे कर्मचारियों से कम मेहनताना नहीं दिया जा सकता. पीठ ने कहा था कि कल्याणी राज्य में तो इस तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकथा. इस तरह का प्रवृत्ति मनुष्य के सम्मान को ठेस पहुंचाने के समान है. बता दें कि, सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब व हरियाणा से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए पहली बार समान काम के बदले समान सुविधा देने के निर्देश संबंधित राज्य सरकार को दिए थे, जिसके बाद बिहार के तकरीबन दर्जन भर नियोजित शिक्षक संगठनों ने भी सरकार के समक्ष समान काम के बदले समान सुविधा का मसला उठाया.

शिक्षक बोले –

  • उत्क्रमित मध्य विद्यालय, डुमरी परमानंदपुर (मुजफ्फरपुर) के शिक्षक संजय कुमार यादव कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट पर हमें पूरा भरोसा है. हम लोगों को जरूर न्याय मिलेगा.
  • मध्य विद्यालय, प्रहलादपुर (मुजफ्फरपुर) के शिक्षक नीरज कुमार : बिहार सरकार की मंशा साफ़ नहीं है. सरकार खुद अपनी किरकिरी करवा रही है. क़ानूनी पक्ष जानते हुए भी वह सुप्रीम कोर्ट चली गयी. सरकार व शिक्षा विभाग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी विचार करना चाहिए.
  • +2 एनकेजे हाईस्कूल, हायाघाट (दरभंगा) के संगीत शिक्षक राम प्रवेश कुमार कहते हैं कि सरकार को सामान वेतन तो देना ही पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने जो राज्य सरकार को आदेश दिया है, उससे नियोजित शिक्षक ख़ुश हैं. हमलोगों को यह विश्वास था कि फैसला शिक्षकों के पक्ष में ही आएगा.
  • उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पिपरी, सकरा के शिक्षक सुरजीत बिहारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हमलोग काफी आशान्वित हैं. फैसला नियोजित शिक्षकों के पक्ष में ही आएगा.
  • टीएसयूएनएसएस (गोप गुट) से जुड़े शिक्षक मो नाजिर हुसैन, मृत्युंजय सिंह, गणेश सिंह, आदर्श अमरेंद्र, हिमांशु शेखर, दिलीप कुमार, मनोज कुमार, अनुज कुमार सिंह, मणिभूषण कुमार, धीरंजन चौधरी, नीरूप कुमार, विवेक कुमार, प्रियव्रत, माल्या शाही, जयनारायण कुमार, चंदा कुमारी, रश्मि कुमारी, अंकिता कुमारी, प्रगति समेत दर्जनों शिक्षकों ने उच्चतम न्यायालय पर विश्वास जताते हुए कहा कि हमें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट जरूर समान काम समान वेतन लागू कराएगी और अंधी-बहरी सरकार को एक सीख देगी. सबने एक स्वर में कहा कि सामान वेतन हमारा अधिकार है. आज न कल तो देना ही होगा. 

                                                                                                                                                                          – अप्पन समाचार डेस्क

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