सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं नियोजित शिक्षकों की निगाहें

मुजफ्फरपुर. बिहार के सरकारी स्कूलों के नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की लड़ाई लगातार लड़ रहे हैं. हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इन शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया, तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गयी. अब हजारों शिक्षकों की निगाहें माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं. राज्य सरकार गुणवत्ता शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत दावे के विपरीत हैं. पढ़ाने-लिखाने के काम से इतर शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है. स्कूली बच्चों को समय से किताबें नहीं मिलती हैं. अभी पांच महीने से शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है. साथ ही, नियोजित शिक्षकों के साथ वेतनमान के मसले पर भेदभाव किया जाना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में एक बड़ी बाधक है.

टीइटी-एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन के मामले में सरकार द्वारा दायर एसपीएल 572/2018 की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 29 जनवरी 2018 को होने की संभावना है. बताते चलें कि Tsunss गोपगुट ने समान काम समान वेतन के मसले पर माननीय हाईकोर्ट में केस नंबर 703/2017 द्वारा जीत हासिल कर चुकी है, जिसपर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लिव पेटीशन दायर किया था, जिसकी सुनवाई होनी है. टीइटी-एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में केविएट भी दायर कर रखा है, ताकि पहली ही सुनवाई में शिक्षक संगठन भी शामिल हो सके. संगठन के सभी पदाधिकारी इस केस के विभिन्न बिंदुओं को देखने व वकील से समझने के लिए दिल्ली में जमे हुए हैं.

जानकारी हो कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन का आदेश पटना हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर 2017 को दिया था. हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार अपील याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की.  इस संबंध में संघ के अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने बताया कि सरकार आरटीइ के अनुरूप बहाल टीइटी शिक्षकों को बरगलाने का काम कर रही है, हकमारी कर रही है. जब पंजाब के एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने समान काम समान वेतन पर फैसला दिया, तो हम टीइटी शिक्षकों में आशा जगी और हम हाईकोर्ट के शरण में गये. हमने लगातार सड़कों पर भी आंदोलन किया है. उधर, सरकार ने विधानसभा में कहा कि अभी हाइकोर्ट में सुनवाई चल रही है. फैसला आते ही समान काम समान वेतन लागू किया जायेगा, लेकिन सरकार ने धोखा देकर सुप्रीम कोर्ट में एसपीएल दायर कर दिया. अब 2 लाख 53 हजार नियोजित शिक्षकों का भविष्य माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिका है. अन्य राज्यों के केसों को अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि फैसला टीइटी शिक्षकों के पक्ष में ही आयेगी, लेकिन सरकार इसको टाल कर स्वयं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा बन रही है.

टीइटी-एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ से जुड़े आदर्श अमरेंद्र बताते हैं कि समान काम समान वेतन की लड़ाई वैसे तो 2009 से माध्यमिक शिक्षक संघ समेत कई शिक्षक संगठन लड़ रहे हैं, लेकिन 2016 में पंजाब के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बिहार में इस आंदोलन ने गति पकड़ी. अमरेंद्र का कहना है कि जब हम नियोजित शिक्षक भी नियमित शिक्षकों इतना काम करते हैं. क्वालिफिकेशन में भी हम कम नहीं हैं उनसे. सर्वे से लेकर विभागीय सभी काम करते हैं हम. उसके बाद भी हमारे और उनके वेतनमान में इतना अंतर क्यों? जहां नियमित शिक्षकों का छठा अनुशंसित वेतनमान 9300-34800 है, वहीं नियोजित शिक्षकों का 5200-20200 रुपये प्रतिमाह. समान काम के लिए असमान वेतन तो नियोजित शिक्षकों के साथ अन्याय ही है. हमारा सरकार से यही मांग है कि समान काम के लिए समान वेतन दिया जाये.

– अप्पन समाचार डेस्क

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