गेहूं की फसल को मिली खरपतवार से मुक्ति

मुजफ्फरपुर. गेहूं की फसल के लिए नासूर बन चुके खरपतवार से जल्द ही किसानों को मुक्ति मिलेगी. खरपतवार विहीन फसल का विकास भी अच्छा होगा. उत्पादन भी बढ़िया होगा. कृषि विज्ञान केंद्र, सरैया में धान के खेत को बिना जाेते जीरोटिलेज मशीन से गेहूं की खेती का सफल प्रयोग हुआ है. किसान इस नये प्रयोग की जानकारी लेकर खेती की लागत को कम करने के साथ-साथ गेहूं के अधिक उत्पादन का लाभ ले सकते हैं. यह प्रयोग सेंट्रल सिस्टम्स इनिसिएटिव फॉर साउथ एशिया (सीसा) के अंतर्गत किया गया है.कृषि विज्ञान केंद्र, सरैया के कार्यक्रम समन्वयक सह प्रोजेक्ट के प्रधान अन्वेषक डॉ जितेंद्र प्रसाद व सह अन्वेषक डॉ एचसी चौधरी बताते हैं कि इस प्रयोग से किसानों को काफी फायदा होगा. जिले में 60 जगहों पर यह प्रयोग किया गया है. एक नवंबर से 25 नवंबर तक गेहूं की बोआई की गयी है. गेहूं की फसलें काफी अच्छी हैं. जीरोटिलेज मशीन की मदद से गेहूं की बोआई की गयी है. बिल्कुल शून्य जोत पर. इसमें उर्वरक व बीज की मात्रा सामान्य बोआई से काफी कम लगे हैं. मात्र 1.5 किलोग्राम बीज व दो किलोग्राम डीएपी उर्वरक का उपयोग किया गया. जीरोटिलेज मशीन को फिक्स कर बीज व उर्वरक को मिलाकर पांच सेंटीमीटर गहराई में बोआई की गयी. गेहूं की वेराइटी 2967 व डीबीडब्ल्यू-14 लगायी गयी है. कम लागत और परिणाम सामने हैं, एक पौधे में 15 से 20 टिलरिंग हुई है. खेत के सभी पौधे पंक्ति में हैं. फसल का विकास अच्छा हो रहा है.

वैज्ञानिक एचसी चौधरी बताते हैं कि सामान्य तरीके से बोआई वाली फसल में काफी बथुआ व अन्य खरपतवार निकले हैं. लेकिन, जीरोटिलेज से बोआई वाली फसल में कोई भी खरपतवार नहीं निकले हैं. सामान्य बोआई में करीब 1000 रुपये प्रति एकड़ खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव पर लागत आती है. यह खर्च जीरोटिलेज में नहीं लगता है. जीरोटिलेज विधि से बोआई वाले खेत में एक घंटे पंपसेट चलाने से चार से पांच कट्ठा जमीन का पटवन हो जाता है. जबकि सामान्य बोआई में प्रति घंटे दो कट्ठा पटवन होता है. इसमें भी किसानों की लागत कम जाती है. यानी, उर्वरक, बीज, जुताई, पटवन, खरपतवार नाशक दवाइयों पर लागत बिल्कुल कम जाती है. हालांकि, धान कटने के बाद दूब को समाप्त करने के लिए ग्लाइफोसेट 10 से 15 एमएल प्रतिलीटर पानी की दर से खेत में छिड़काव करना फायदेमंद रहा. 48 घंटे पहले यह छिड़काव करना है.

इन स्थानों पर हुआ प्रयोग
सरैया के भटौलिया, बहिलवारा भुआल, मुहम्मदपुर खाजे, चकइब्राहीम, गवसरा, द्वारिकापुर, नारायणपुर, पैगंबरपुर, सकरा के राजापुर, डिहुली, पिपरी, मेहसी, बगाही, सकरा, बंदरा के सकरी चांदपुरा, मुतलुपुर, घसिराम, पीपरपतिया, सरबौरा, मुन्नी बैंगरी, हत्था, रतवारा, मुशहरी के मनिका, बोचहां के गरहां, गायघाट के रामनगर, बोआरीडीह, पटसारा, घोसरामा, मीनापुर, बेरुआ आदि स्थानों खेत को बिना जोते जीरोटिलेज से गेहूं की बोआई की गयी है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इन स्थानों पर फसल में खरपतवार नहीं निकले हैं. फसल अच्छी है.

इनपुट : सरैया से प्रेम

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