जाति-धर्म के नाम पर स्कूल-कॉलेज का नाम

मुजफ्फरपुर. जाति-धर्म भारतीय समाज की पहचान बन चुकी है. इसके बिना यहाँ काम नहीं चलता है. इसी के ढांचे में हमारी समाज-व्यवस्था ढली है. इस संकुचित वर्ण व्यवस्था व धर्म-कर्म ने समाज को टुकड़ों में बांट कर रखा है. खान-पान से लेकर शादी-ब्याह तक में जाति-धर्म गाहे-बगाहे आ ही जाते हैं. लोगों ने अपने कथित जाति के नाम के अनुसार अपने नाम के साथ टाइटल लगाते हैं. लेकिन क्या किसी शैक्षणिक संस्थान का नाम भी जाति-धर्म के नाम पर रखा जाना उचित है? क्या ‘भूमिहार ब्राह्मण कॉलेजियट स्कूल’, ‘काशी हिंदू विश्वविद्यालय’, ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ जैसे नाम स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी का क्या सही है? क्या इस सवाल पर भी विमर्श होना चाहिए?
मुजफ्फरपुर के मोतीझील में दूकान चलनेवाले धरमलाल कहते हैं कि ‘भूमिहार ब्राह्मण कॉलेजियट स्कूल’ नाम तो आजादी के पहले से ही हैं. इस स्कूल में सभी जाति-धर्म के बच्चे पढ़ते हैं. इसको लेकर हीन भावना मत पालिये. मुशहरी प्रखंड स्थित एक सरकारी स्कूल के शिक्षक नीरज कुमार कहते हैं कि जाति के नाम पर स्कूल-कॉलेज का नाम तो बिलकुल नहीं होना चाहिए. इससे जातिवाद को बढ़ावा मिलता है. हां, रखना ही है तो किसी महान पुरुष के नाम पर रखे, जिनसे बच्चे प्रेरणा ले सके.

यूजीसी ने दिया था सुझाव : विश्वविद्यालय से हटे हिंदू व मुस्लिम शब्द
यूजीसी के एक पैनल ने पिछले महीने सुझाव दिया था कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से हिंदू व मुस्लिम जैसे शब्दों को हटाया जाना चाहिए, क्योंकि ये शब्द इन विश्वविद्यालयों की धर्मनिरपेक्ष छवि को नहीं दिखाते हैं. इस पैनल का गठन 10 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए किया गया था. पैनल ने ये सिफारिशें एएमयू की लेखा परीक्षा रिपोर्ट में की थीं. पैनल के एक सदस्य ने तब बताया था कि केंद्र सरकार से वित्तपोषित विश्वविद्यालय धर्मनिरपेक्ष संस्थान होते हैं, लेकिन इन विश्वविद्यालयों के नाम के साथ जुड़े धर्म से संबंधित शब्द संस्थान की धर्मनिरपेक्ष छवि को नहीं दर्शाते हैं. पैनल के सदस्य ने कहा था कि इन विश्वविद्यालयों को अलीगढ़ विश्वविद्यालय व काशी विश्वविद्यालय कहा जा सकता है अथवा इन विश्वविद्यालयों के नाम इनके संस्थापकों के नाम पर रखे जा सकते हैं. इसके बाद सियासी भूचाल आना स्वाभाविक था. तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं. केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के नाम में बदलाव करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.

आजादी के बाद से ही इन विवि के नाम पर जारी है बहस जारी
फर्स्टपोस्ट वेबसाइट के अनुसार, भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना आजाद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, इन दोनों ही विश्वविद्यालयों में से धार्मिक शब्दों को 1951 से पहले हटाने की बात कही थी. सरकार, बीएचयू एक्ट, 1915 और अलीगढ़ मुस्लिम एक्ट, 1920 में सुधार का प्रस्ताव भी 1948 में रख चुकी थी हालांकि बात आगे नहीं बढ़ी थी. 1961 में जवाहर लाल नेहरू ने भी इन शब्दों को हटाने के संदर्भ में कहा था कि ये तभी संभव हो सकेगा जब विश्वविद्यालयों से जुड़े लोग इस कदम के लिए तैयार हों. बल्कि नेहरू के कार्यकाल के आखिरी दौर में शिक्षामंत्री बने एमसी छागला ने तो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का नाम बदल ही दिया था, पर छात्र आंदोलन के बाद संशोधन विधेयक स्थगित करना पड़ा था.

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-अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

नारीवादी लेखिका रीता बनर्जी ने टवीट कर इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है -

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