बनारस की बेटियों की आह सुन लीजिये प्रधानमंत्रीजी

पत्रकार सिद्धार्थ मोहन की बीएचयू से ऑंखों देखी रिपोर्ट : आज रविवार के दिन बीएचयू में कर्फ्यू की स्थिति बनी हुई है. मैं तीन-चार लाठियां खाने के बाद थोड़ी दूरी पर बैठा हुआ हूं. सुना है कि अमर उजाला का कोई फोटोग्राफर भी लाठियां खाकर बैठा है. यह मीडिया पर भी हमला है, लेकिन मैं उन लड़कियों के लिए चिंतित हूं जो कल रात से लगातार फोन कर रही हैं.

लड़कियों के हॉस्टल के गेट बाहर से बंद कर दिए गए हैं. कल रात की पिटाई में पुलिस ने छात्राओं के साथ-साथ किसी-किसी वार्डेन को भी पीट दिया. अब लड़कियों को कहा जा रहा है कि जिसको भी दुर्गापूजा की छुट्टी के लिए घर जाना है, आज ही निकल जाओ.

ऐसे में कुछ लड़कियों-लड़कों ने हिम्मत की है निकलने की तो कैम्पस में मौजूद सीआरपीएफ और पीएसी के जवान पीटने लग रहे हैं. स्थिति गंभीर है. बीएचयू का आधिकारिक बयान कह रहा है कि “राष्ट्रविरोधी ताकतें राजनीति कर रही हैं”. शायद बलात्कार और यौन शोषण का विरोध करना राष्ट्रविरोध राजनीति है, ऐसा मुझे हाल के दिनों में पता चला है.

बहुत सारे लोग बाहर से जुट रहे हैं. बहुत सारे लोग अंदर जुटना चाह रहे हैं तो कुलपति त्रिपाठी उन्हें पिटवा दे रहा है. कल रात का मुझसे किया गया वादा कि “भईया, हम लोग सुबह फिर से गेट पर बैठेंगे”, धीरे-धीरे टूट रहा है. अब एक नया संकल्प है कि छुट्टी के बाद फिर से आंदोलन करेंगे. हो सकता है कि ऐसा कुछ हो. लेकिन ऐसा नहीं भी हो सकता है. तीन अक्टूबर तक बहुत कुछ बदल जाएगा.

अपनी बेटियों, पत्नियों, प्रेमिकाओं से कहिए ज़रूर कि लड़कियां लड़ रही हैं. मैं भी कह ही रहा हूं. मैंने लिखने वाली नौकरी पकड़ी है, लेकिन इतना तो भीतर बचा है कि कभी भी इन लड़कियों के लिए खड़ा हुआ जाए. इस वादे पर नहीं टिका तो घंटा जिएंगे?

इस कैम्पस के अंदर की प्रगतिशील आत्माएं मर गयी हैं. कोई अध्यापक गेट तक नहीं आया. एक साथ बीस अध्यापक भी गेट पर आ गए होते तो ये लड़कियां उन्हें जीवन भर के लिए अपना शिक्षक मानतीं. इन अध्यापकों का विश्वविद्यालय प्रशासन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी कुछ न कर पाता.

ये एक बार और क्यों न लिखा जाए कि यहां कोई राजनीतिक दल या विचारधारा शामिल नहीं है. कई लोग जुट रहे हैं आज. कई लोगों को जुटना भी चाहिए. क्या होगा नहीं पता? लेकिन बदलाव लाने का एक तो उजाला अब दिखने लगा है. – फेसबुक से साभार

कैसे हिंसक हुआ छात्राओं का आंदोलन

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छेड़खानी और कैंपस में महिला सुरक्षा को लेकर पिछले दो दिनों से जारी छात्राओं को प्रदर्शन शनिवार रात हिंसक हो उठा. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात कुलपति आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे छात्र-छात्राओं पर बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों की ओर से किए गए पथराव के बाद बीएचयू में जंग जैसे हालात बन गए. रिपोर्ट के अनुसार, हालात को काबू करने के कैंपस में घुसी पुलिस फोर्स को छात्रों का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा. परिसर में गुरिल्ला युद्ध की स्थिति बन गई तो पुलिस को हवाई फायरिंग के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े.

Photo Credit : PTI

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, तनाव को देखते हुए 25 सितंबर की दशहरा की छुट्टियों को तीन दिन पहले लागू कर दिया गया और अब विश्वविद्यालय में दो अक्टूबर तक छुट्टी रहेगी. इसके अलावा कुलपति ने घटना की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, रात 10 बजे कुलपति आवास के सामने प्रदर्शन करने जा रहे छात्रों पर कैंपस के सुरक्षा गार्डों और पुलिस ने लंका गेट और महिला महाविद्यालय के पास लाठीचार्ज कर दिया. इसमें आधा दर्जन छात्रों को चोटें आईं. इसके बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस की लाठीचार्ज के जवाब में पथराव शुरू कर दिया

द वायर के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं से बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं के ख़िलाफ़ विद्यार्थी गुरुवार से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस विरोध-प्रदर्शन की शुरूआत तब हुई जब कला संकाय की एक छात्रा के साथ हॉस्टल लौटते समय मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने कथित तौर पर छेड़खानी की. शिकायतकर्ता के अनुसार जब उसने उनके प्रयासों का प्रतिकार किया तो तीन लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसके बाद भाग गए. छात्रा का आरोप है कि घटनास्थल से तकरीबन 100 मीटर की दूरी पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने उन लोगों को रोकने के लिये कुछ भी नहीं किया. उसने अपने वरिष्ठ छात्रों को इस बारे में बताने की जगह वार्डन को घटना की जानकारी दी., जिस पर वॉर्डन ने उससे ही सवाल किया कि वह इतनी देर से हॉस्टल क्यों लौट रही थी. वॉर्डन के इस जवाब ने छात्रा के साथियों को नाराज़ कर दिया और वे गुरुवार की मध्यरात्रि को परिसर के मुख्य द्वार पर धरना पर बैठ गए. बीएचयू छात्राओं का आरोप है कि उन्हें परिसर में नियमित छेड़खानी करने वालों का सामना करना पड़ता है और विश्वविद्यालय प्रशासन असामाजिक तत्वों को रोकने के लिये कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. पुलिस और बीएचयू प्रोफेसरों ने छात्राओं को शांत करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं किया और विश्वविद्यालय के कुलपति से आश्वासन की मांग की.

बीएचयू को बदनाम करने की साजिश : कुलपति

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों का हंगामा विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश है. शनिवार रात को बीएचयू परिसर में हुई हिंसा में बाहरी लोग शामिल थे. वीसी ने कहा कि छेड़खानी की घटना के दिन ही हमारे सुरक्षा अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कर ली थी. हमने घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनायी है, जो अपने काम में लगी हुई है. उन्होंने कहा, ‘उपद्रव की घटना बाहरी लोगों की देन है. हमारे विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहनेवाले करीब 25 हजार छात्र इस उपद्रव में शामिल नहीं थे. इस बात की मुझे खुशी है.

उधर, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि नारी रक्षा व गरिमा की बात करने वालों ने बीएचयू में छात्राओं व प्रेस पर लाठीचार्ज कर साबित कर दिया है कि अब आवाज़ उठाने की आज़ादी भी छिन गयी है. उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे घटनाक्रम पर जांच का आदेश दिया है.


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कवि इमरान प्रतापगढ़ी लिखते हैं कि जब गंगा मैया की बेटियों ने पुकारा तब काशी में होते हुए भी उनकी पुकार को अनसुना कर गए साहेब (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी)। ऐसे बचेंगी बेटियाँ? ऐसे पढ़ेंगी बेटियाँ?

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