आंग सान सू ची की तसवीरें फूंकीं

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर में शनिवार को भारतीय मानव अधिकार सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने म्यांमार की आंग सान सू ची समेत बर्मा के कई राजनेताओं की तसवीर समेत वहां के झंडे को जला कर विरोध-प्रदर्शन किया. परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम राजू नैयर ने कहा बर्मा में जो हिंसा हो रही है, वह बेहद अमानवीय व निंदनीय है. नैयर ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों व हिंदुओं के खिलाफ हिंसा रोकने की पहल करें.

हिंदू महिलाओं के साथ कर रहे थे रेप
अमर उजाला के मुताबिक, म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लमानों के खिलाफ हिंसा अब धार्मिक मुद्दे से ऊपर उठ चुकी है. क्या मुसलमान क्या हिंदू … हिंसा करनेवालों के निशाने पर हर कोई था, जो उनके सामने आ रहा था, ये कहाना है रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप में रहने वाली अखिरा धार का. ये सब बताते हुए अखिरा धार की आंखें आंसू से भर गयीं. उन्होंने बड़ी ही मुश्किल से खुद को संभाला, लेकिन उनकी आखों के आगे उस रात का खौफनाक मंजर नजर आ रहा था. वहीं, मंजर जिसमें धार के सामने ही उनके पति और घर वालों को बेदर्दी से मार दिया गया. नकाबपोश बदमाशों ने उनके घर लूट लिए, पूरा का पूरा गांव जला दिया. गांव में कोई भी मर्द जिंदा नहीं बचा. अपनी कोख में चार महीने का बच्चा लेकर अखिरा किसी तरह से वहां से बच निकली. वह अब कुटुपालंग में हिंदू के लिए बने शिविर, हिंदूपारा में रह रही हैं. उन्होंने बताया कि बदमाश हिंदू महिलाओं के साथ रेप कर रहे थे. जब उन्हें यह बताया कि हम हिंदू हैं, तो भी वे नहीं रुके। गांव को जलाने से पहले वह हर महीला का रेप कर रहे थे.

मुस्लिम देशों का रवैया भी जिम्मेदार
डॉयचे वेले के अनुसार, तुर्की से लेकर पाकिस्तान तक मुस्लिम देशों के नेताओं ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या लोगों के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान की निंदा की है जिसके कारण लगभग तीन लाख लोग इलाके को छोड़ कर भागने पर मजबूर हुए हैं. ऐसे में, म्यांमार की नेता आंग सान सू ची से शांति का नोबेल वापस लेने तक की मांगें भी तेज हो रही हैं. म्यांमार में रोहिंग्या लोगों के साथ जो कुछ हो रहा है, वह निंदनीय है. लेकिन इसके लिए मुस्लिम देशों का रवैया भी कम जिम्मेदार नहीं है. अगर मुस्लिम बहुल देशों का रिकॉर्ड देखें तो उनके यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कोई अच्छा सलूक नहीं होता. पिछले दिनों ही पाकिस्तान के क्वेटा शहर में हजारा शिया समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी गयी. दरअसल पाकिस्तान में तो इस्लामी कट्टरपंथी बरसों से अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बना रहे हैं और सरकार ने कभी उनकी तकलीफों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया. हिंदू, ईसाई और अहमदिया लोगों के साथ भेदभाव दशकों से हो रहा है. पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून की वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के लोग लगातार डर के माहौल में जीते हैं. पाकिस्तान में मुसलमानों ने ईसाइयों की बस्तियों में आग तक लगायी हैं और हिंदू समुदाय के लोगों को इस्लाम या उसके पैगंबर मोहम्मद का “अपमान” करने पर सरेआम कत्ल कर दिया जाता है.

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