अंधविश्वास में काटे जा रहे नारियल व नीम के पेड़

साहेबगंज से खुशबू || पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ के नारे को अंधविश्वास ने झूठा साबित कर दिया है। कुछ ढोंगी, ओझा व भगत लोग पेड़–पौधों के दुश्मन बन गये हैं। हैरानी की बात है कि शिक्षित लोग भी पेड़ों को बचाने के बदले उसे काटने पर तुले हैं। पेड़ों को लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां व्याप्त हैं। अशोक के पेड़ दरवाजे पर लगाना अपशकुन माना जाता है। यदि नीम के पेड़ दरवाजे पर हैं, तो समझिये आपके दरवाजे पर भूत की साया है। मुजफ्फरपुर के साहेबगंज प्रखंड के हुस्सेपुर पंचरूखिया गांव के देवेंद्र सिंह ओझा के चक्कर में पड़कर पांच–छह नारियल के पेड़ कटवा चुके हैं। उन्हें बताया गया कि नारियल का पेड़ वंश पर बुरा प्रभाव डालता है। वंशवृद्धि रुक जाती है। ओझा गांव के शिक्षित–अशिक्षित लोगों की मानसिकता में पेड़ों के प्रति भ्रांतियां भर रहे हैं। हुस्सेपुर मठिया के ललन भगत और चांदकेवारी के कविन्द्र प्रसाद भी ओझा के चक्कर में दर्जनों पेड़ कटवा चुके हैं। स्थानीय ओझा रामस पासवान का कहना है कि दरवाजे पर नारियल, नीम, कटहल, गुलर, बरगद, पीपल आदि का पेड़ नहीं लगाना चाहिए। एक शिक्षक ने भी अपने घर के पिछवाड़े से कटहल का पेड़ कटवा दिया, जबकि गुरुजी पास के विद्यालय में बच्चों को पर्यावरण का पाठ पढ़ाते हैं।
चिकित्सक डॉ अर्जुन दास निशांत कहते हैं कि पेड़–पौधे कहीं से भी नुकसानदेह नहीं हैं। पर्यावरण व जीव–जंतु के लिए पौधे वरदान हैं। कुछ लोग अंधविश्वास फैलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जब बरगद, पीपल, नीम व नारियल जैसे गुणकारी पेड़ों को काटा जायेगा, तो पर्यावरण का संरक्षण कैसे होगा।
अहम बात है कि बरगद और पीपल रात में भी वायुमंडल में ऑक्सीजन देते हैं। पुराणों में वृक्षों की पूजा का उल्लेख है। गांव में पीपल की पूजा होती है। नीम रोगरोधक होता है। वायुमंडल को शुद्ध रखता है। इससे आसपास के लोगों को शुद्ध हवा मिलती है। पेड़–पौधे हमारे लिए शुद्ध हवा देने के साथ–साथ वायुमंडल को प्रदूषण भी सोख लेता है। इससे वातावरण स्वच्छ रहता है। पेड़ हमारे मित्र हैं। 
 
 

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