हम मुर्दा नहीं हैं, इसलिए बोलेंगे

तेजतर्रार पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद देशभर में उबाल देखा जा रहा है. मोदी शासन के तीन साल बीतने के बाद पहली बार भाजपा सरकार व पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रोश की आग सुलगती दिख रही है. ट्विटर पर खुलेआम मोदी को लोग अनफॉलो कर अपने गुस्से का इजहार कर चुके हैं. आखिर क्या वजह है कि दक्षिण की एक महिला पत्रकार की हत्या ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक भूचाल खड़ा कर देता है. जिस शख्सियत को जो लोग जानते तक नहीं थे, उसकी मौत की खबर सून कर वे उद्वेलित हो गये. लोगों में सहानुभूित व गुस्से साथ-साथ उभरे. हिंदी पट्टी में भी रोष है. वजह साफ थी कि जिस विचारधारा को वर्तमान केंद्रीय सत्ता देश पर थोपना चाहती है, गौरी लंकेश उसका जोरदार तरीके से मुखालफत करती रही हैं. खुलेआम संघ के विचारधारा की आलोचना करनेवाली गौरी ने धार्मिक कट्टरता, हिंदुत्व व जातिवाद पर प्रहार करने में कभी डरी नहीं. उन्हें इसके लिए धमकियां भी मिल चुकी थीं, लेिकन उसकी परवाह किये बिना वह अंतिम सांस तक अपनी प्रतिक्रिया देती रहीं. गौरी कहा करती थीं कि हम मुर्दा नहीं हो सकते. खुद को इजहार करना और प्रतिक्रिया देना हमारा मानवीय गुण है. हम आवेश में जो भी कहते हैं, वो अक्सर हमारी सबसे ईमानदार प्रतिक्रिया होती है.

यही कारण था कि जब गौरी लंकेश की हत्या हुई, तो देश उबल पड़ा और जांच से पहले ही लोग मानने लगे कि यह हत्या संघ-भाजपा के गूंडों या फिर हिंदू कट्टरपथियों ने ही की है. पिछले तीन साल में हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के नाम पर जिस तरीके से एक खास विचारधारा को थोपने की चाल चली जा रही है और मोदी शासन के खिलाफ बोलनेवालों की आवाज को डरा-धमका कर दबाया जाता रहा है. ऐसे समय में गौरी की शहादत लकवाग्रस्त मीडिया व जय-जयकारा करने में लगे समाज की धमनियों में शायद कुछ रक्त संचार तेज हो जाये.

द वायर हिंदी के मुताबिक, गौरी अपने पिता पी. लंकेश के उसूलों पर अडिग रहीं. उनका अख़बार धर्मनिरपेक्षता, दलितों, महिलाओं और समाज में पिछड़े लोगों के अधिकारों पर मुखर रहा. उनके पिता का तेज़तर्रार स्वरूप उनके लेखन में भी दिखाई देता था. वे दक्षिणपंथ और जातिवादी राजनीति की आलोचना में लिखते वक़्त कोई रियायत नहीं बरतती थीं. जब सोशल मीडिया चलन में आया, तो वे यहां भी सक्रिय हुईं. उनकी फेसबुक और ट्विटर टाइमलाइन पर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर उनकी निडर और बेबाक राय को देखा जा सकता है. वे लोगों या अपनी राय से जुड़ी अपनी भावुकता को लेकर कभी कोई शर्म महसूस नहीं करती थीं. पिछले साल छात्र नेता कन्हैया कुमार का भाषण सुनने के बाद उन्होंने कन्हैया को बेंगलुरु बुलाया. उन्होंने सोशल मीडिया पर उसे अपना ‘बेटा’ भी बताया. गौरी को काफी ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा, उन्होंने अनाप-शनाप कहा गया. बहुत से लोग उन्हें ये कहकर नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि वे अपने पिता की प्रसिद्धि का फायदा उठा रही हैं. उन्हें नक्सलियों का हमदर्द, देश-विरोधी, हिंदू-विरोधी और पता नहीं क्या-क्या कहा गया. लेकिन इनमें से कोई भी उन्हें प्रभावित नहीं कर सका. पिछले हफ्ते मैंने मज़ाक में उनसे कहा कि वे सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी को नहीं समझतीं. इस पर उन्होंने कहा, ‘जो टेक्नोलॉजी को समझते हैं, वो ख़ामोश हैं. मैं वो करुंगी जो मैं कर सकती हूं, वो कहूंगी, जो मुझे कहना चाहिए. इन असहिष्णु आवाज़ों को हमारी ख़ामोशी से ही ताकत मिलती है. उन्हें धमकियों के बजाय शब्दों से बहस करना सीखने दो.’

कर्नाटक के एक प्रतिष्ठित लिंगायत परिवार में जन्मीं गौरी लंकेश (29 जनवरी 1962-5 सितंबर 2017) अपने विचारों में नास्तिक थीं। उन्होंने इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की थी. 55 साल की गौरी ने अपना करियर बेंगलुरू से ही ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ के साथ शुरू किया था. कुछ समय के लिए वह दिल्‍ली आईं और फिर वापस बेंगलुरू लौट गईं जहां ‘संडे’ मैग्‍जीन के साथ नौ वर्षों तक काम किया. 2000 में जब उनके पिता की मौत हुई थी, तब वह इनाडु के तेलुगू चैनल के साथ काम कर रही थीं. वह कन्‍नड़ साप्‍ताहिक अखबार ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थी, जिसे उनके पिता पी. लंकेश ने शुरू किया था. गौरी दिलेर पत्रकार थीं और अपनी बात बेबाकी के साथ रखने में कतई डरती नहीं थीं. वह कर्नाटक की सिविल सोसायटी की चर्चित चेहरा थीं.

किसने क्या कहा : 

  • जाने-माने संगीतकार एआर रहमान ने बेंगलुरु की पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की निंदा करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात उस भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करते जिसे वह जानते हैं. रहमान ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि मैं इस घटना को लेकर दुखी हूं. इस तरह की चीजें भारत में नहीं होती हैं. मैं चाहता हूं कि भारत प्रगतिशील और दयालु हो.
  • राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट के जरिए केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर संवेदना जाहिर करते हुए लालू ने कहा कि पत्रकारों के लिए एक आवश्यक सूचना न्यू इंडिया में प्रश्न ना पूछें. जान भी जा सकती है. खामोशी बनाए रखें. मन की बात सुनें, अपनी नहीं, आलमपनाह की.’
  • भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ्रेंस के माध्‍यम से कर्नाटक सरकार से पूछा कि राज्‍य सरकार ने गौरी लंकेश को सुरक्षा क्‍यों नहीं दी हुई थी. रवि शंकर प्रसाद ने गौरी लंकेश की हत्‍या के बाद बीजेपी ने कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने बिना जांच के ही बता दिया कि वरिष्‍ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्‍या के लिए जिम्‍मेदार कौन है.रविशंकर प्रसाद ने यह सवाल भी किया कि बुद्धिजीवी वर्ग केरल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत पर चुप क्‍यों है? दूसरी तरफ कर्नाटक के गृह मंत्री रामालिंगा रेडडी ने गौरी लंकेश के हत्‍यारों का सुराग देने वालों को 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. पुलिस गौरी लंकेश के घर से मिली सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हत्‍यारों को पकड़ने की कोशिश कर रही है.
  • कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के श्रंगेरी से विधायक जीवाराज ने कहा कि लंकेश जिंदा होतीं, अगर उन्‍होंने आरएसएस के खिलाफ नहीं लिखा होता. यदि गौरी ने संघ के कार्यकर्ताओं की मौत का जश्‍न मनाने पर नहीं लिखा होता, तो आज शायद वह जिंदा होती. बीजेपी विधायक ने कोपा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बयान दिया है.
  • बीबीसी से बात करते हुए लेखक मंगलेश डबराल कहते हैं कि उनकी हत्या यक़ीनन विचारधारा के कारण हुई है. वो पिछले दो साल से दक्षिणपंथी ताकतों के निशाने पर थीं और अंतत: वो उनकी हत्या करने में सफल हुए. वो कहते हैं अपने पिता पी लंकेश की तरह ही वो भी एक निर्भीक पत्रकार थीं. कन्नड़ पत्रकारिता और साहित्यिक पत्रकारिता में उनकी ‘लंकेश पत्रिका’ की प्रमुख भूमिका रही. मंगलेश बताते हैं कि पिछले दो सालों से उनको अनेक तरह की धमकियां दी जा रही थीं. वो कहते हैं, गौरी ने बार-बार लिखा कि मैं एक सेकुलर देश की इंसान हूं और मैं किसी भी तरह की धार्मिक कट्टरता के ख़िलाफ़ हूं.

अप्पन समाचार न्यूज नेटवर्क

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